नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले संसद के ‘हंस’ द्वार पर मीडिया से बातचीत में विपक्ष के रवैये और सदन की कार्यवाही में निरंतर हंगामे को लेकर कड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था की मजबूती दुनिया बड़ी बारीकी से देख रही है और भारत ने सिद्ध कर दिया है कि ‘Democracy can deliver’। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए यह सत्र नई पीढ़ी के सांसदों के लिए अनुभव और सीख लेने का अवसर है।
ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए….
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संसद का शीतकालीन सत्र पराजय या विजय के अहंकार का मैदान नहीं बनना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से अपील की है कि वह पराजय की निराशा से बाहर निकलकर मजबूत मुद्दे उठाए। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया, ‘यह सत्र विकसित भारत के प्रयासों में ऊर्जा भरने का अवसर है। यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए। राष्ट्रनीति और नीति निर्माण पर ध्यान दें’।
विपक्ष पर तंज : हार की बौखलाहट बंद करें…..
प्रधानमंत्री ने विपक्ष की हार पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ दल पराजय नहीं पचा पाते हैं। सदन को व्यक्तिगत हमलों या नारेबाजी का अखाड़ा बनाना छोड़कर जनता के मुद्दों और नीतिगत चर्चा पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा, ‘मैं टिप्स देने को तैयार हूं कि विपक्ष कैसे अपने प्रदर्शन को सुधार सकता है’।
नए सांसदों को बोलने दें…..
पीएम मोदी ने नई पीढ़ी और छोटे दलों के सांसदों को बोलने का अवसर नहीं मिलने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहली बार चुने गए सांसदों को अपने क्षेत्र और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का मौका देना चाहिए। संसद को नई पीढ़ी के अनुभवों और दृष्टिकोण से लाभ उठाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सदन केवल राजनीति का मंच नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की जगह है।
निगेटिविटी छोड़ें, राष्ट्र निर्माण पर फोकस करें……
प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति में नकारात्मकता की कुछ उपयोगिता हो सकती है, लेकिन अंततः देश के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण और नीति निर्माण जरूरी है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे पराजय की निराशा को पीछे छोड़कर राष्ट्र निर्माण और जनता के मुद्दों पर चर्चा करें।
