लोकतंत्र सवेरा : लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा आज श्रद्धा और पवित्रता के साथ शुरू हो गया है। चैत्र मास में मनाए जाने वाले इस महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ हुई, जिसमें व्रती पवित्र स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और चार दिवसीय कठिन व्रत का संकल्प लेते हैं। यह पर्व विशेष रूप से संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगल कामना के लिए रखा जाता है।

सूर्य उपासना और छठी मैया की आराधना…….
छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत के माध्यम से व्रती 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखकर कठोर नियमों का पालन करते हैं। यह पर्व शुद्धता, संयम और आत्मअनुशासन का प्रतीक माना जाता है, जिसमें पूजा के दौरान नदी, तालाब और घाटों पर विशेष अर्घ्य अर्पित किया जाता है।
जाने नहाय-खाय से लेकर अर्घ्य तक की विधि…..
चार दिवसीय इस महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसमें व्रती शुद्ध भोजन ग्रहण कर व्रत का आरंभ करते हैं। इस दिन लौकी की सब्जी. चने की दाल और भात खाते हैं। दूसरे दिन खरना का आयोजन होता है, जिसमें दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत की जाती है। तीसरे दिन छठ पूजा का मुख्य अनुष्ठान होता है, जिसे संध्या अर्घ्य कहा जाता है। इस दिन व्रती नदी, तालाब या घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। चौथे दिन उषा अर्घ्य के साथ व्रत का समापन होता है, जिसमें उगते सूर्य को जल अर्पित कर पारण किया जाता है।
