जमशेदपुर : लगातार रहने वाला जोड़ों का दर्द और अकड़न अक्सर बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, हर बार ऐसा नहीं होता। कई ऑटोइम्यून और सूजन संबंधी बीमारियां भी शुरुआत में सामान्य ऑर्थोपेडिक दर्द जैसी ही दिखाई देती हैं। ऐसे में लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द की समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है। यह कहना है ब्रह्मानंद नारायणा हॉस्पिटल, जमशेदपुर के कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक सर्जरी डॉ. प्रशांत आर्य का।

सुबह की अकड़न और कई जोड़ों में सूजन हो तो रहें सतर्क……
डॉ. आर्य के अनुसार, रुमेटिक बीमारियों की पहचान के लिए कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सुबह उठने के बाद 30 मिनट से अधिक समय तक जोड़ों में अकड़न रहना इसका प्रमुख संकेत हो सकता है। इसके अलावा एक से अधिक जोड़ों में सूजन, विशेषकर शरीर के दोनों तरफ समान रूप से सूजन होना भी रुमेटिज्म की ओर इशारा कर सकता है. इन बीमारियों में लगातार थकान भी महसूस हो सकती है। एक महत्वपूर्ण संकेत यह है कि कई मामलों में दर्द हिलने-डुलने से कम और आराम करने पर अधिक महसूस होता है। हालांकि, हर मरीज में सभी लक्षण एक जैसे हों, यह जरूरी नहीं है।
ऑर्थोपेडिक और रुमेटिक दर्द में अंतर…..
सामान्य ऑर्थोपेडिक दर्द की वजह अक्सर स्पष्ट होती है। यह किसी चोट, अत्यधिक शारीरिक गतिविधि या किसी खास जोड़ पर लगातार दबाव पड़ने के कारण हो सकता है। ऐसे मामलों में आराम करने से दर्द में राहत मिल सकती है. इसके विपरीत, रुमेटिक दर्द कई बार बिना किसी स्पष्ट कारण के शुरू हो सकता है और एक साथ कई जोड़ों को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ जोड़ों में अकड़न और सूजन के अलावा त्वचा पर चकत्ते या हल्का बुखार जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे संकेत मिलने पर केवल दर्द निवारक दवाओं के भरोसे रहने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
समय पर इलाज से रोका जा सकता है स्थायी नुकसान….
रुमेटिक और ऑटोइम्यून बीमारियों में समय पर जांच और उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। इलाज में देरी होने पर जोड़ों को गंभीर और कई बार स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। कुछ बीमारियां शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रभावित कर सकती हैं। उदाहरण के तौर पर ल्यूपस लंबे समय तक शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकता है. इसी तरह एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का समय पर उपचार नहीं होने पर रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा में उपलब्ध नए उपचारों की मदद से कई रुमेटिक बीमारियों को लंबे समय तक नियंत्रित किया जा सकता है।
लगातार दर्द हो तो विशेषज्ञ से लें सलाह…..
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में लगातार बने रहने वाले ऐसे दर्द और अकड़न को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जिसकी कोई स्पष्ट वजह समझ में नहीं आ रही हो। समय पर जांच से बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो सकती है और उचित उपचार शुरू किया जा सकता है. जोड़ों का दर्द हमेशा उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा नहीं होता। यदि दर्द लंबे समय से बना हुआ है, सुबह ज्यादा अकड़न रहती है, कई जोड़ों में सूजन है या दर्द आराम करने पर बढ़ता है, तो रुमेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है। समय पर जांच और उपचार भविष्य में होने वाली गंभीर जटिलताओं और लंबे समय की तकलीफ को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकता है।



























































