लोकतंत्र सवेरा : लोकआस्था के महापर्व छठ में जहां लोग सूर्य उपासना के साथ तप, संयम और श्रद्धा की मिसाल पेश करते हैं, वहीं कुछ लोग अपनी सेवा भावना से समाज में प्रेरणा का स्रोत बन जाते हैं. ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण हैं राखा कॉलोनी निवासी 72 वर्षीय सुरेंद्र प्रसाद गुप्ता, जो पिछले 37 वर्षों से छठ पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क गेंहू और चावल की पिसाई कर रहे हैं।

















































छठ पर्व में शुद्धता और पवित्रता का विशेष महत्व होता है. व्रती महिलाएं पूजा के लिए गेहूं से ठेकुआ और चावल से प्रसाद तैयार करती हैं. इसी भावना को समझते हुए श्री गुप्ता हर वर्ष अपने मिल को व्रतियों की सेवा में समर्पित कर देते हैं. वे किसी से भी एक रुपये का शुल्क नहीं लेते. उनका कहना है छठ माता की कृपा से ही मुझे यह अवसर मिलता है कि मैं कुछ सेवा कर सकूं. यह परंपरा मेरे लिए पूजा से कम नहीं है. वही उन्होंने कहा कि फिलहाल अभी तीन वर्षो से गुरुद्वारा निवासी मंटू यादव द्वारा गेहूं व चावल पिसाई का पूरा खर्चा वे उठा रहे है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सुरेंद्र गुप्ता की यह सेवा अब पूरे क्षेत्र में एक परंपरा और मिसाल बन चुकी है. आसपास के गांवों राखा, जादूगोड़ा, इचरा, यूसिल कॉलोनी, आदि से भी श्रद्धालु अपने गेहूं-चावल पिसवाने के लिए आते हैं. हर साल उनके मिल के बाहर व्रतियों की लंबी कतारें लगती हैं, लेकिन श्री गुप्ता और उनका परिवार पूरे मनोयोग से सभी की सहायता करते हैं।
राखा कॉलोनी के निवासी मनोज सिंह कहते हैं सुरेंद्र जी का यह निःस्वार्थ भाव समाज को जोड़ने वाला है. वे बिना किसी प्रचार या दिखावे के वर्षों से जो कर रहे हैं, वह आज के समय में सचमुच दुर्लभ है।
छठ पर्व के अवसर पर जब लोग=अपने-अपने तरीके से आस्था प्रकट करते हैं, सुरेंद्र गुप्ता अपनी सेवा और समर्पण से यह संदेश देते हैं कि सच्ची पूजा वही है जो दूसरों के लिए की जाए. उनकी यह अनूठी पहल न केवल छठ व्रतियों के लिए बड़ी राहत साबित होती है, बल्कि समाज में सादगी, सहयोग और मानवता की भावना को भी जीवित रखती है।
स्थानीय लोग उम्मीद जता रहे हैं कि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस प्रेरक परंपरा को आगे बढ़ाएंगी, ताकि आस्था के साथ सेवा की यह भावना सदैव जीवित रहे।





