जमशेदपुर। श्रीनाथ विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी एवं कृषि विभाग के संयुक्त प्रयास से रांची स्थित आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस विजिट से छात्रों ने उन्नत शोध गतिविधियों और वर्तमान में प्रचलित सतत कृषि पद्धतियों का व्यापक अनुभव प्राप्त किया।


इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान छात्रों ने समेकित कृषि प्रणाली (आईएफएस) के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझा। इस दौरान उन्हें यह बताया गया कि कैसे कृषि, वानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन के समन्वय से सतत और लाभकारी कृषि संभव है। छात्रों ने यहां आधुनिक मशरूम उत्पादन तकनीकों को देखा और समझा और मिट्टी के स्वास्थ्य सुधार के लिए बायोचार उत्पादन की लाइव प्रक्रिया का भी अवलोकन किया।
भ्रमण के दौरान छात्रों को नैनो बायोटेक्नोलॉजी, गुणसूत्रीय विभाजन और तनाव-सहिष्णु फसलों के लिए जीन संपादन जैसे अत्याधुनिक शोध कार्यों से भी परिचित कराया गया। इसके साथ ही उन्होंने अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का दौरा किया, जहां मास स्पेक्ट्रोमेट्री, रियल-टाइम पीसीआर, यूएचपीएलसी और जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस जैसी तकनीकों को कार्य करते हुए देखा। इस अनुभव का सबसे यादगार क्षण तब रहा, जब छात्रों ने पहली बार डीएनए अणुओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
इस दौरान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी के संयुक्त निदेशक के साथ हुई वार्ता सत्र ने छात्रों के ज्ञान को और विकसित किया। इस शैक्षणिक भ्रमण ने न केवल सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव के बीच की दूरी को कम किया, बल्कि छात्रों को अनुसंधान आधारित करियर की ओर प्रेरित भी किया।
