जमशेदपुर : नारायण आईटीआई में भारत की प्रसिद्ध राष्ट्रवादी कवयित्री एवं स्वतंत्रता सेनानी सुभद्रा कुमारी चौहान की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें नमन किया गया।
इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर पांडे ने उनके जीवन एवं साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुभद्रा कुमारी चौहान केवल एक महान कवयित्री ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की निर्भीक सेनानी भी थीं। उनका जन्म 16 अगस्त 1904 को प्रयागराज में हुआ था और बचपन से ही उनमें साहित्य के प्रति अद्भुत रुचि दिखाई देने लगी थी।
डॉ. पांडे ने बताया कि उनकी अमर कविता झाँसी की रानी ने देशवासियों के हृदय में स्वतंत्रता की ज्वाला प्रज्वलित की। वे महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रहीं और कई बार जेल भी गईं। उनका जीवन त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायी उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि 15 फरवरी 1948 को एक सड़क दुर्घटना में उनका असामयिक निधन हो गया, किंतु उनका साहित्य और विचार आज भी देशवासियों के हृदय में जीवित हैं। विद्यार्थियों को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्राचार्य जयदीप पांडे, प्रकाश महतो, शांति राम महतो, भगत लाल तेली, शशि प्रकाश महतो, शुभम साहू, संजीत महतो, पवन महतो, गौरव महतो, अजय मंडल, कृष्ण पद महतो सहित अन्य शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
