जमशेदपुर : शहर के बारीडीह क्षेत्र में स्थित चर्चित मर्सी अस्पताल एक बार फिर गंभीर विवादों और चर्चाओं के घेरे में आ गया है। अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था और इलाज के दौरान कथित लापरवाही को लेकर परिजनों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है।

परिजनों के गंभीर आरोप
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान भारी कोताही बरती गई। उनकी शिकायतों में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- जांच और डॉक्टर की अनुपस्थिति: सीटीजी (CTG) जांच के दौरान डॉक्टर की मौजूदगी न होना और चिकित्सकीय निर्णय में देरी होना।
- दवा और उपचार में लापरवाही: ब्लड प्रेशर (BP) से जुड़ी दवाओं के सही प्रबंधन और समय पर उचित उपचार न मिलने का आरोप।
- ऑक्सीजन और नवजात की देखभाल: परिजनों का कहना है कि प्रसूता को समय पर ऑक्सीजन नहीं दी गई, साथ ही नवजात शिशु की देखभाल और उसकी चिकित्सकीय जरूरतों को लेकर भी गंभीर लापरवाही बरती गई।
- एम्बुलेंस सेवा में देरी: जरूरत के समय एम्बुलेंस के समय पर नहीं पहुंचने से मरीज की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।
परिजनों का साफ तौर पर कहना है कि यदि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकों द्वारा समय रहते उचित कदम उठाए जाते, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन की सूची में शामिल है अस्पताल
गौरतलब है कि मर्शेदपुर का यह प्रतिष्ठित मर्सी अस्पताल बारीडीह क्षेत्र में स्थित है और पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन की अधिकृत अस्पतालों की सूची में भी आता है। ऐसे में एक बड़े अस्पताल की कार्यप्रणाली पर इस तरह के गंभीर सवाल खड़े होना कई बड़े प्रशासनिक और चिकित्सीय मुद्दों को जन्म देता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई इलाज के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही हुई है, या फिर यह पूरी प्रक्रिया को लेकर उपजी कोई गलतफहमी है? इन तमाम आरोपों की सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
इस मामले में अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकों का पक्ष आना बेहद महत्वपूर्ण है। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रबंधन इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई देता है और क्या जिला स्वास्थ्य विभाग इस मामले में संज्ञान लेते हुए किसी प्रकार की जांच कमेटी का गठन करता है या नहीं।
