लोकतंत्र सवेरा/जमशेदपुर : आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने मानगो नगर निगम में ऐसा सियासी दांव खेला है, जिसने पार्टी के भीतर हलचल तेज कर दी है। तमाम दावेदारों और समीकरणों को दरकिनार करते हुए भाजपा ने मेयर पद के लिए प्रदेश व्यापार प्रकोष्ठ के संयोजक नीरज सिंह की धर्मपत्नी संध्या सिंह को अपना समर्थित प्रत्याशी घोषित कर दिया है।
इस एक फैसले ने कई पुराने नेताओं की उम्मीदों पर एक झटके में पानी फेर दिया। खासकर वरिष्ठ भाजपा नेता राजकुमार श्रीवास्तव, जो बीते कल तक अपनी धर्मपत्नी कुमकुम श्रीवास्तव के समर्थन का दम भर रहे थे, आज खुद को हाशिये पर खड़ा महसूस कर रहे हैं। पार्टी ने न तो उनके दावे को तरजीह दी और न ही उनकी वर्षों की निष्ठा को कोई खास महत्व दिया।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भाजपा की अंदरूनी सियासत को बेनकाब कर दिया है। संदेश साफ है— पार्टी में कितने साल बिताए, कितनी निष्ठा दिखाई… इससे फर्क नहीं पड़ता। फर्क पड़ता है तो सिर्फ आपकी पहुंच, आपके समीकरण और आपकी लॉबिंग की ताकत से।
मानगो की राजनीति में यह फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या पुराने कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस करेंगे? क्या भीतरखाने नाराजगी खुलकर सामने आएगी? या फिर सब “अनुशासन” के नाम पर चुप्पी साध लेंगे?
फिलहाल इतना तय है कि भाजपा का यह दांव मानगो नगर निगम चुनाव को रोचक से ज्यादा विस्फोटक बना चुका है। आने वाले दिनों में पार्टी के अंदर की यह खींचतान चुनावी मैदान में क्या रंग दिखाएगी—इस पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।
