जमशेदपुर : नगर परिषद चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी को लेकर भाजपा नेता देवी शंकर दत्ता उर्फ काबू दत्ता ने संगठन और नेतृत्व के फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
काबू दत्ता ने कहा कि करीब 19–20 दिन पहले भाजपा कार्यालय में हुई बैठक में नगर परिषद चुनाव के लिए लगभग 11 समर्पित कार्यकर्ताओं से आवेदन लिए गए थे। ये वही लोग हैं जो— हर पार्टी कार्यक्रम में सबसे आगे रहते हैं, झंडा-बैनर से लेकर भीड़ जुटाने तक की जिम्मेदारी निभाते हैं, संगठन द्वारा सौंपा गया हर काम बिना सवाल किए करते आए हैं लेकिन इसके बावजूद, टिकट के समय उन्हें किनारे कर दिया गया।
उन्होंने तीखे शब्दों में सवाल उठाया—
“आख़िर ऐसा क्या हुआ कि जो लोग कल तक झामुमो के मंत्रियों और नेताओं के बैनर-पोस्टर अपने घरों और शहर के चौराहों पर लगाते थे, वही आज भाजपा समर्थित उम्मीदवार बन बैठे?”
काबू दत्ता ने दावा किया कि नगर परिषद चुनाव की अधिसूचना से ठीक एक दिन पहले तक शहर की गलियों में झामुमो नेताओं के बैनर लगे हुए थे। और फिर— रातों-रात सियासी तस्वीर बदल गई। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा—
“वो कौन-सी रात थी, कौन-सा मंदिर था और कैसी प्रसादी चढ़ाई गई कि सालों से पसीना बहाने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया?”
उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ टिकट का मुद्दा नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान और संगठन की आत्मा का सवाल है. अगर हर चुनाव में बाहर से आए चेहरे पार्टी समर्थित बनते रहेंगे और जमीनी कार्यकर्ता सिर्फ झंडा-बैनर तक सीमित रहेंगे, तो संगठन की रीढ़ कैसे बचेगी?
इसी कड़ी में काबू दत्ता ने सभी भाजपा कार्यकर्ताओं से डर छोड़कर आवाज उठाने की अपील की—
“अगर आज नहीं बोले, तो हर बार हमारी भावनाओं को कुचला जाता रहेगा।”
नगर परिषद चुनाव से पहले भाजपा के भीतर उठी यह आवाज अब संगठनात्मक संकट का संकेत मानी जा रही है। अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को समय रहते संभालता है या फिर यह आग आने वाले दिनों में और तेज़ होकर फूटती है।
