जमशेदपुर : शनिवार की शाम एक भीषण सड़क हादसे ने एक पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। इलाज के दौरान पहले पत्नी ने दम तोड़ा और कुछ ही देर बाद पति भी ज़िंदगी की जंग हार गया। एक घर में एक साथ दो अर्थियां उठीं — और पीछे रह गए मासूम बच्चों की सिसकियां और बुज़ुर्ग मां की टूटती हुई उम्मीदें।

हादसे में गंभीर रूप से घायल दंपती को अस्पताल लाया गया था, लेकिन क़िस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पत्नी ने रात में ही आख़िरी सांस ली, और पति ने शनिवार की शाम दम तोड़ दिया। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, हर आंख नम हो गई।
सोमवार को जब दोनों की शवयात्रा एक साथ निकली, तो पूरा गांव श्मशान घाट तक उनके पीछे-पीछे चल पड़ा। दो छोटे बच्चे — एक 12 साल की बेटी और 10 साल का बेटा — अपने मां-बाप के शव से लिपटकर रोते रहे। मां बार-बार बेहोश हो जा रही थी। हर कोई उन्हें संभालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन दर्द इतना बड़ा था कि शब्द भी छोटे पड़ गए।
परिजनों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद ट्रांसपोर्ट कंपनी और प्रशासन ने सिर्फ आश्वासन दिए, लेकिन किसी ने ज़िम्मेदारी नहीं ली। मुआवजे को लेकर सहमति नहीं बन पाई, और इसी पीड़ा के साथ दोनों का अंतिम संस्कार करना पड़ा।
