सरायकेला-खरसावां। चांडिल : चांडिल अनुमंडल में अवैध बालू खनन, भंडारण और परिवहन के खिलाफ खनन विभाग द्वारा की गई तथाकथित “बड़ी कार्रवाई” के दावों की पोल 24 घंटे के भीतर ही खुलती नजर आ रही है। एक ओर विभाग ने औचक निरीक्षण का ढोल पीटते हुए हजारों घनफुट अवैध बालू जब्ती की बात कही, वहीं दूसरी ओर नीमडीह थाना क्षेत्र के सिंदूपुर गांव स्थित शाखा नदी में आज फिर दिनदहाड़े बेखौफ अवैध बालू खनन देखा गया।




कागजों पर कार्रवाई, जमीन पर माफिया राज
खनन विभाग द्वारा चलाए गए निरीक्षण अभियान में तिरुलडीह थाना क्षेत्र के मौजा–सपाड़ा और सिरकाडीह में लगभग 1,10,000 क्यूबिक फीट तथा ईचागढ़ थाना क्षेत्र के सोड़ो जरगोड़ीह में करीब 45,000 क्यूबिक फीट अवैध बालू जब्त करने का दावा किया गया। इसके अलावा सिरकाडीह में मिट्टी खनिज के अवैध उत्खनन में लगी एक जेसीबी मशीन भी जब्त की गई।
लेकिन सवाल यह है कि जब इतनी बड़ी मात्रा में अवैध बालू पकड़ी जा रही थी, तब तक खनन विभाग कहां सोया हुआ था? और उससे भी बड़ा सवाल — कार्रवाई के ठीक अगले दिन फिर अवैध खनन कैसे शुरू हो गया?
शाखा नदी में टेंडर नहीं, फिर बालू कौन उठा रहा है?
आज नीमडीह थाना अंतर्गत सिंदूपुर गांव की शाखा नदी में जो दृश्य सामने आया, उसने खनन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह नदी न तो किसी टेंडर में शामिल है, न ही बड़े खनन योग्य नदी की श्रेणी में आती है। एक पतली-सी छोटी नदी, जिसे स्थानीय लोग जीवनरेखा मानते हैं — लेकिन आज हालत यह है कि नदी और जमीन में फर्क करना मुश्किल हो गया है।
भारी मात्रा में बालू ढुलाई के कारण नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ता दिख रहा है। आखिर इतने ताकतवर कौन हैं ये बालू माफिया?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि
👉 ना पुलिस का डर,
👉 ना प्रशासन की चिंता,
👉 ना खनन विभाग की कोई मौजूदगी।
आखिर शाखा नदी में अवैध बालू उत्खनन करने वाले कौन लोग हैं, जो आज सरकार और प्रशासन से भी ज्यादा ताकतवर हो चुके हैं? क्या इन्हें किसी का संरक्षण प्राप्त है? या फिर खनन विभाग ने सचमुच आंखें बंद कर सोने का ठेका ले रखा है?
जनप्रतिनिधियों की शिकायतें, फिर भी विभाग मौन
गौरतलब है कि चांडिल अनुमंडल में अवैध बालू खनन को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि उपायुक्त, आयुक्त और यहां तक कि मुख्य सचिव तक कई बार लिखित शिकायतें दे चुके हैं। बावजूद इसके, कार्रवाई सिर्फ दिखावटी छापेमारी तक सीमित रही।
आरोप है कि रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक अवैध बालू परिवहन बेरोक-टोक चलता है, और खनन विभाग समय-समय पर सिर्फ औपचारिक कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है।
दिखावा या स्थायी कार्रवाई?
अब सवाल यह नहीं है कि बालू जब्त हुई या नहीं।
सवाल यह है कि —
- क्या यह कार्रवाई स्थायी होगी?
- या फिर कुछ दिनों बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा?
- क्या हालिया छापेमारी सिर्फ जनता का ध्यान भटकाने के लिए • की गई थी?
- और क्या असली अवैध खनन आज भी पहले की तरह जारी रहेगा?
जब तक शाखा नदी जैसी बिना टेंडर वाली नदियों से बालू उड़ती रहेगी, तब तक खनन विभाग की हर कार्रवाई सिर्फ कागजी खानापूर्ति और जनता की आंखों में धूल झोंकने के अलावा कुछ नहीं मानी जाएगी।
