जमशेदपुर : एमजीएम थाना क्षेत्र में स्थित नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी इन दिनों विवादों में घिरी हुई है। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार यह विश्वविद्यालय झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की आधिकारिक सूची में दर्ज नहीं है। इतना ही नहीं, राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों की जानकारी देने के लिए शुरू किए गए गुरुजी एप पर भी इस विश्वविद्यालय का नाम शामिल नहीं है। इस खुलासे के बाद छात्रों और अभिभावकों में गहरी चिंता फैल गई है।


कई छात्र पहले ही अनजाने में इस यूनिवर्सिटी में दाखिला ले चुके हैं। अब सवाल यह खड़ा हो गया है कि अगर संस्थान को मान्यता प्राप्त नहीं है तो यहां से प्राप्त डिग्री का भविष्य में क्या महत्व होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी सूची में शामिल न होने वाले विश्वविद्यालय की डिग्री प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षा संस्थानों में मान्य नहीं होती, जिससे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

यूनिवर्सिटी के संचालन को लेकर फीस भुगतान की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि प्रबंधन अधिकतर कैश में फीस जमा करने की शर्त रखता है। ऐसे में जिन परिवारों के पास तुरंत इतनी नकद राशि उपलब्ध नहीं होती, उनके बच्चे दाखिला प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते और उनकी पढ़ाई प्रभावित हो जाती है।
यह पूरा मामला राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़ा करता है। जब उच्च शिक्षा संस्थानों की निगरानी का दायित्व विभाग के पास है, तो फिर इस तरह के संस्थानों को संचालित होने की अनुमति कैसे मिली और छात्रों को पहले से स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई।
स्थानीय छात्र और अभिभावक इस मामले में सरकार से जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी मान्यता प्राप्त नहीं है तो छात्रों को तत्काल सूचित किया जाए, ताकि उनके भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो।
