लोकतंत्र सवेरा/जमशेदपुर : खेल की धरती के नाम से मशहूर जमशेदपुर में एक ऐसा मैदान है केबुल क्रिकेट एकेडमी “CCA” जिसने कभी क्रिकेट के कई सितारों को जन्म दिया। यही वह मैदान है, जहां से झारखंड के स्टार बल्लेबाज सौरव तिवारी ने अपने क्रिकेट सफर की शुरुआत की थी। इसी मैदान पर कोच काजल दास जैसे समर्पित गुरु ने न जाने कितने युवा खिलाड़ियों को तराशा, जिन्होंने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन से नाम रोशन किया।

















































लेकिन विडंबना यह है कि आज वही ऐतिहासिक मैदान मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह वंचित है। मैदान में घास नहीं, पिच टूटी-फूटी, चारों ओर गंदगी का आलम और खिलाड़ियों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं। बारिश हो या धूप, युवा खिलाड़ी अपने जुनून के सहारे अभ्यास तो करते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या यही हाल उस मैदान का होना चाहिए जिसने राज्य को सौरव तिवारी जैसे खिलाड़ी दिए?
स्थानीय खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों का कहना है कि वर्षों से यह मैदान प्रशासन की अनदेखी का शिकार है। ना ड्रेसिंग रूम, ना टॉयलेट, ना ड्रिंकिंग वॉटर की सुविधा — फिर भी यहां के युवा हर दिन उम्मीद लेकर आते हैं कि शायद किसी दिन उनके खेल की चमक इस उपेक्षा को मिटा देगी।
कोच काजल दास ने भी कई बार प्रशासन और खेल विभाग को पत्र लिखकर मैदान की हालत सुधारने की मांग की है, लेकिन नतीजा सिफर। उनका कहना है —
“हमने इस मैदान से कई खिलाड़ियों को राज्य और देश के स्तर पर भेजा, लेकिन आज यही मैदान अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। अगर सुविधाएं मिलें, तो यहां से सैकड़ों और सौरव तिवारी निकल सकते हैं।”
खेल प्रेमियों का कहना है कि जब करोड़ों रुपये स्टेडियमों और इवेंट्स पर खर्च किए जाते हैं, तो इस मैदान की अनदेखी स्थानीय प्रतिभाओं के साथ अन्याय है।
अब सवाल उठता है कि आखिर कब तक ऐसे मैदानों की उपेक्षा होती रहेगी?
कब प्रशासन इन खिलाड़ियों के सपनों को साकार करने के लिए जागेगा?
और कब सौरव तिवारी जैसे नए सितारों को फिर से वही मंच मिलेगा, जहां से उन्होंने उड़ान भरी थी?





