जमशेदपुर | लोकतंत्र सवेरा डेस्क : कहते हैं कि कानून मदद के लिए होता है, लेकिन जब वही कानून मानवीय संवेदनाओं पर भारी पड़ जाए, तो उसका नतीजा कितना भयावह हो सकता है—इसका ज्वलंत उदाहरण बन गया यह मामला।

















































सोनारी निवासी झारखंड सरकार की सेवानिवृत शिक्षिका अंजलि बोस का आज तड़के एमजीएम अस्पताल में निधन हो गया। विडंबना यह रही कि इलाज के लिए लाखों रुपये बैंक खाते में मौजूद थे, लेकिन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सोनारी शाखा की कानूनी अड़चन के कारण वह रकम वक्त पर नहीं मिल सकी… और एक शिक्षिका जिंदगी की जंग हार गई।
सुबह 10 बजे पहुंचे बैंक अधिकारी, सुबह 8 बजे थम चुकी थीं सांसें…..
जानकारी के अनुसार, बैंक के अधिकारी आज सुबह 10:00 बजे पैसे लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन उससे दो घंटे पहले ही सुबह 8:00 बजे अंजलि बोस का निधन हो चुका था। यह खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में मौजूद परिजन फूट-फूट कर रो पड़े, वहीं बैंक अधिकारियों को परिजनों के गुस्से का भी सामना करना पड़ा।
नॉमिनी नहीं होने का बना बहाना, इलाज में देरी बनी मौत की वजह…..
अंजलि बोस वर्ष 2008 में कपाली विद्यालय से सेवानिवृत हुई थीं। सेवानिवृत्ति के समय मिली पूरी राशि उन्होंने SBI सोनारी शाखा में जमा कर दी थी।
अविवाहित होने के कारण उन्होंने खाते में किसी को नॉमिनी नहीं बनाया था।
जब उनकी तबीयत बिगड़ी और डॉक्टरों ने बड़े अस्पताल में बेहतर इलाज की सलाह दी, तब सबसे बड़ी समस्या सामने आई—
➡️ पैसा बैंक में था, लेकिन हाथ में नहीं था।
बैंक-बैंक भटकते रहे परिजन, नहीं सुनी गई एक भी बात…..
अंजलि बोस की छोटी बहन गायत्री बोस ने बताया कि वह लगातार बैंक अधिकारियों से गुहार लगाती रहीं, हालात समझाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन
“नियम है, प्रक्रिया है”
यही जवाब हर बार मिला।
मामले में कूदे भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह……
बैंक से मदद नहीं मिलने पर परिजनों ने भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह को मामले की जानकारी दी। विकास सिंह अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले से उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम को अवगत कराया। उनकी पहल पर उपायुक्त ने देर रात ही बैंक और परिजनों से संपर्क साधा और मदद की प्रक्रिया शुरू करवाई।
लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी……
सरकारी मशीनरी और बैंक हरकत में तो आई, लेकिन
👉 वह काम जो पहले किया जाना चाहिए था, वह मौत के बाद किया गया।
“अगर समय रहते मदद मिल जाती, तो जान बच सकती थी” – विकास सिंह
विकास सिंह ने साफ शब्दों में कहा—
“स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सोनारी शाखा के अधिकारियों ने जो काम आज किया, अगर वही काम पहले कर दिया गया होता, तो अंजलि बोस आज हमारे बीच होतीं।”
माफी मांगकर बच नहीं सकता सिस्टम…..
अस्पताल पहुंचे बैंक अधिकारियों ने परिजनों से माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की बात कही, लेकिन सवाल यह है—
❓ क्या एक माफी उस जान की भरपाई कर सकती है?
❓ क्या नियम इंसानियत से ऊपर है?
यह सिर्फ एक मौत नहीं, सिस्टम पर सवाल है……
यह मामला सिर्फ अंजलि बोस की मौत का नहीं है, यह सवाल है—
➡️ बैंकिंग सिस्टम की संवेदनहीनता पर
➡️ कानून की जकड़न पर
➡️ और उस व्यवस्था पर, जो हरकत में तब आती है जब सब कुछ खत्म हो चुका होता है।
लोकतंत्र सवेरा इस मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग करता है।





