जमशेदपुर : आदित्यपुर स्थित श्रीनाथ विश्वविद्यालय में नौवां अन्तर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिंदी महोत्सव का दूसरा दिन पूरे हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। आज जहाँ विद्यार्थियों के लिए कई सांस्कृतिक, विज्ञान और तकनीक से जुड़ी हुई प्रतियोगिताएं आयोजित हुई तो वहीं कई रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुतियां हुई। महोत्सव के दूसरे दिन चिंतन-मनन सत्र में “प्रशासनिक कार्यों में हिंदी की प्रासंगिकता और प्रभाव” विषय पर चर्चाएं हुई। चिंतन-मनन सत्र में वरीय पुलिस अधीक्षक पूर्वी सिंहभूम, पीयूष पांडेय, कर्नल विनय आहूजा, कमांडिंग ऑफिसर, 37 बटालियन एनसीसी तथा सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता श्रीमती संस्कृति मिश्रा भी उपस्थित रही। चिंतन-मनन सत्र की समन्वयक सहायक प्राध्यापक श्रीमती रचना रश्मि और श्रीमती शिवांगी रही।
इस अवसर पर वरीय पुलिस अधीक्षक पूर्वी सिंहभूम, पियूष पांडेय, ने कहा कि अपराध नियंत्रण में जागरूकता सबसे प्रभावी हथियार है और लोगों को जागरूक करने का सबसे सशक्त माध्यम हिंदी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि साइबर क्राइम और डिजिटल अरेस्ट जैसे जटिल और नए शब्दों को जब हिंदी में सरल ढंग से समझाया जाता है, तो आम जनता उन्हें बेहतर तरीके से समझ पाती है और भ्रम का शिकार नहीं होती।
उन्होंने यह भी कहा कि धरना–प्रदर्शन या तनावपूर्ण परिस्थितियों में यदि प्रशासन लोगों से उनकी अपनी भाषा में संवाद करता है, तो स्थितियां जल्दी और शांतिपूर्वक सुलझ जाती हैं। आपातकालीन व्यवस्थाओं में हिंदी एक प्रभावी भाषा है और पुलिसकर्मियों के लिए भी यह एक सहज, स्वाभाविक और आरामदायक कार्यभाषा है।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि देश को कोलोनियल हैंगओवर से बाहर निकलने में समय लगेगा, क्योंकि हिंदी को आज भी अधिकतर साहित्यिक भाषा के रूप में देखा जाता है, न कि पूर्णतः वैधानिक भाषा के रूप में।
कर्नल विनय आहूजा, कमांडिंग ऑफिसर, 37 बटालियन एनसीसी, जमशेदपुर ने कहा कि एनसीसी जैसे संगठनों में, जहाँ युवा वर्ग सीधे जुड़ा होता है, हिंदी प्रेरणा और राष्ट्रबोध का सशक्त माध्यम बनती है। उन्होंने बताया कि एनसीसी के प्रशिक्षण में हिंदी का व्यापक प्रयोग किया जाता है और भारतीय सेना में भी अधिकांश आदेश हिंदी में ही दिए जाते हैं। इससे अनुशासन, एकरूपता और भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है तथा जवानों और कैडेट्स में स्पष्ट संप्रेषण सुनिश्चित होता है।
भविष्य में प्रशासनिक एवं रक्षा संस्थानों में हिंदी को और अधिक प्रभावी कार्यभाषा बनाने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत शिक्षा व्यवस्था से होनी चाहिए। स्कूल स्तर पर हिंदी शिक्षण को मजबूत किया जाए और कक्षा 12वीं तक हिंदी को अनिवार्य रखने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
न्यायिक व्यवस्था में हिंदी की भूमिका पर सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता संस्कृति मिश्रा ने कहा कि ई–कोर्ट और ऑनलाइन याचिकाएँ जैसी व्यवस्थाओं में अभी भी अंग्रेज़ी का वर्चस्व बना हुआ है। भारत में बड़ी संख्या में कॉन्वेंट स्कूलों के कारण अंग्रेज़ी का प्रभाव अधिक है, वहीं साहित्यिक हिंदी और विधिक हिंदी के बीच स्पष्ट अंतर भी एक बड़ी चुनौती है।
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यदि न्यायिक बहसों, दस्तावेज़ों और आदेशों में सरल और स्पष्ट हिंदी का प्रयोग किया जाए, तो आम नागरिक की न्याय तक पहुँच अधिक सहज, सीधी और लोकतांत्रिक बन सकती है। वर्तमान स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट में हिंदी में बहस संभव नहीं है, जो आम नागरिक को न्यायिक प्रक्रिया से मानसिक रूप से दूर कर देती है। इस दिशा में वरिष्ठ अधिवक्ताओं और न्यायिक संस्थानों को गंभीर पहल करनी चाहिए।
इस अवसर पर श्रीनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रों डॉ एसएन सिंह ने कहा कि हमारे श्रीनाथ विश्वविद्यालय के द्वारा जो हिंदी भाषा को लेकर प्रयास किया जा रहा है वह निश्चित तौर पर प्रशंसनीय है। यह महोत्सव विधार्थियों को अपनी कला कौशल को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
आयोजित की गई प्रतियोगिताएं – रेडियो श्रीनाथ (अंतिम चरण), हिन्दी टंकण, वाक्य वीर, नृत्य नाटिका, लघु नाटिका, (प्रथम चरण) स्टार्टअप श्रीनाथ, प्रकरण अध्ययन, साहित्य के नौ रस (रंगोली), प्रश्नोत्तरी (अंतिम चरण), रील्स संचार रहे।
साईं विश्वविद्यालय, कॉलेज ऑफ नर्सिंग (टीएमएच) डीबीएमएस कॉलेज ऑफ एजुकेशन, महिला कॉलेज चाईबासा, जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज, मॉडल महाविद्यालय सरायकेला, पटमदा डिग्री कॉलेज जल्ला, मधुसूदन टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, चक्रधरपुर, केएमपीएम कॉलेज, जमशेदपुर, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्य़ालय चाईबासा, स्वामी विवेकानंद कॉलेज सालबनी इत्यादि के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के प्रतिभागी सम्मिलित हुए।
प्रतियोगिताओं के निर्णायक के रुप में श्रीमती वर्षा सिंह, सुश्री प्रिया कुमारी, सागर चन्ना, अमरनाथ, प्रमोद कुमार सिंह, आर जे अभय, आर जे मनोज, हरिपदो मुखी, अनूप कुमार सिंह, रामचन्द्र मार्डी, मोहम्मद आमिर, अभिषेक गौतम, डॉ मनिला कुमारी, प्रिय रंजन शामिल हुए।
