जमशेदपुर : श्रीनाथ विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स में एक दिवसीय इको प्रिंट कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की पर्यावरण-संवेदी और सतत कला प्रथाओं को बढ़ावा देने की पहल का हिस्सा था। कार्यशाला का प्रशिक्षण सत्र सुश्री तृष्णा दास के द्वारा संचालित किया गया, जो इको-फ्रेंडली प्रिंटमेकिंग और पेपर-आधारित कला प्रक्रियाओं की अनुभवी प्रशिक्षक हैं।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य छात्रों को प्रकृति-आधारित सामग्री और तकनीकों के माध्यम से कला निर्माण के वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों से परिचित कराना था। इसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए थे जिसमें इको प्रिंटिंग की थ्योरी और प्रैक्टिकल पहलुओं का परिचय देना, पत्तियाँ, फूल और प्राकृतिक रंजकों जैसी सामग्रियों के उपयोग से जैविक पैटर्न और छवियों के निर्माण की प्रक्रिया का प्रदर्शन करना, कला, पारिस्थितिकी और डिजाइन के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना था।
सत्र की शुरुआत इको प्रिंटिंग के इतिहास, दर्शन और पर्यावरणीय संदर्भ में इसकी महत्ता पर चर्चा के साथ की गई। छात्रों को पौधों के चयन, मॉर्डेंट तैयार करने, फैब्रिक बंडलिंग, तथा भाप देने की प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी चरणों से अवगत कराया गया, जिनके माध्यम से प्राकृतिक रंगों को कपड़े और कागज़ पर स्थानांतरित किया जाता है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रशिक्षक और विभाग के प्रोफेसर के मार्गदर्शन में फाइन आर्ट्स के छात्रों ने विभिन्न प्राकृतिक सामग्रियों के साथ प्रयोग करते हुए कई आकर्षक कला-रचनाएँ तैयार कीं। यह गतिविधि न केवल रचनात्मक थी बल्कि छात्रों को प्रकृति और कला के बीच स्पर्शात्मक संबंध अनुभव कराने वाली भी रही।
इस कार्यशाला का आयोजन विभागाध्यक्ष गणेश महतो के शैक्षणिक नेतृत्व में किया गया। इसे सफल बनाने में सहायक प्रोफेसर अंजन महंती, सुश्री रिमी अदक, सुश्री दिपर्णा साहा और सुश्री सायंतनी दासगुप्ता का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनके मार्गदर्शन ने छात्रों के लिए सत्र को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बनाया।
कार्यशाला ने छात्रों को सतत कला-निर्माण और प्राकृतिक रंगों व सामग्रियों की संभावनाओं के प्रति जागरूक किया। प्रतिभागियों ने इको-फ्रेंडली कलात्मक प्रक्रियाओं में गहरी रुचि दिखाई। कार्यशाला ने न केवल छात्रों के तकनीकी कौशल में वृद्धि की, बल्कि स्कूल ऑफ फाइन आर्ट की इस शैक्षणिक दृष्टि को भी मजबूत किया कि कला शिक्षा में रचनात्मकता, स्थिरता और आलोचनात्मक चिंतन का समावेश आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि सुश्री तृष्णा दास को श्रीनाथ विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार महोदया डॉ मौसुमी महतो और शंभु संध्या एजुकेशनल ट्रस्ट की ट्रस्टी श्रीमती मौमिता महतो के द्वारा सम्मानित किया गया।
