जमशेदपुर/धनबाद : भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जमशेदपुर महानगर जिला अध्यक्ष एवं वर्तमान में धनबाद जिला प्रभारी रहे राजकुमार श्रीवास्तव ने पार्टी के सभी दायित्वों एवं प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। करीब 45 वर्षों से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे राजकुमार श्रीवास्तव ने अपनी उपेक्षा और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी को इस्तीफे का मुख्य कारण बताया है।
राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि वे पिछले 45 वर्षों से पार्टी के एक सच्चे सिपाही के रूप में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते आ रहे हैं। भले ही उन्हें वर्तमान में कोई भौतिक दायित्व नहीं दिया गया, लेकिन वे निरंतर समर्पित कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि आज पार्टी में आदर्शवादी और जमीन स्तर पर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं की मेहनत को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि केवल पद प्राप्ति के उद्देश्य से आने वाले लोगों को महत्व और सम्मान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कई ऐसे लोग, जो सार्वजनिक रूप से पार्टी के कार्यक्रमों पर गलत टिप्पणी करते हैं, उन्हें भी जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। इससे पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई अधिकारी और पदाधिकारी कार्यकर्ताओं को मिलने-जुलने से रोकते हैं तथा ऐसे स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जहां सामान्य कार्यकर्ता पहुंच ही नहीं सकते।
राजकुमार श्रीवास्तव ने संगठन की कार्यशैली पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि पहले जब कोई नेता किसी जिले में प्रवास पर आते थे तो कार्यकर्ताओं के घरों में उनका स्वागत और भोजन होता था, लेकिन अब बड़े होटलों में ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जाती है तथा सामान्य कार्यकर्ताओं को मिलने से रोका जाता है। उनके अनुसार, 2019 के बाद से झारखंड में पार्टी की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है और इसका एक बड़ा कारण कार्यकर्ताओं में बढ़ती निराशा है।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि “नए दस लोग चले जाएं, लेकिन हमारा एक भी पुराना कार्यकर्ता नहीं टूटना चाहिए।” राजकुमार श्रीवास्तव का कहना है कि आज उस भावना की भी उपेक्षा की जा रही है।
संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह पर भी उन्होंने पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी और संपन्न लोगों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि नामांकन के बाद प्रदेश या केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया और चुनाव में दायित्व प्राप्त पदाधिकारियों ने भी उनसे संवाद करना उचित नहीं समझा।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में मानगो नगर निगम का चुनाव नीतिगत रूप से गैर-राजनीतिक है और किसी भी राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़ा जा रहा है। इस चुनाव में उनकी पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव मेयर पद की प्रत्याशी हैं, जो विगत 30 वर्षों से पार्टी की सेवा करती रही हैं। राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उनसे अपनी पत्नी का साथ छोड़ने का निर्देश दिया गया, जिसे वे अनुचित मानते हैं और ऐसा आदेश मानने के लिए बाध्य नहीं हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय महामंत्री मुख्यालय अरुण कुमार सिंह के जमशेदपुर आगमन के दौरान भाजपा समर्थित प्रत्याशी संध्या सिंह के कार्यालय में उनकी उपस्थिति रही, जो उनके घर से मात्र सौ गज की दूरी पर था। इसके बावजूद 45 वर्षों से पार्टी में सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ता के रूप में उनसे मुलाकात नहीं की गई। इस घटनाक्रम को भी उन्होंने उपेक्षा का उदाहरण बताया।
अंत में राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि घोर उपेक्षा और कार्यकर्ताओं में बढ़ती हताशा के कारण वे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहे हैं। उन्होंने अपने त्यागपत्र को स्वीकार करने का अनुरोध करते हुए कहा कि कमल फूल उनके हृदय में सदैव रहेगा, किंतु आत्मसम्मान और निष्ठा के साथ समझौता संभव नहीं है।
