सरायकेला-खरसावां (चांडिल) : Chandil अनुमंडल क्षेत्र के पाटा स्थित National Highway 33 फोरलेन पर बने टोल प्लाजा के समीप कथित अवैध कारोबार को लेकर क्षेत्र में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।

चारदीवारी के भीतर चल रहा संदिग्ध कारोबार…….
प्राप्त जानकारी के अनुसार, टोल प्लाजा के पास एक चारदीवारी के अंदर बिना वैध अनुमति विभिन्न प्रकार के कारोबार संचालित होने की बात सामने आई है। आरोप है कि सड़क से गुजरने वाले भारी वाहनों के चालकों से कथित मिलीभगत कर लोहे के पाइप, सरिया, सीमेंट, आयरन गोटी समेत अन्य निर्माण सामग्री अवैध रूप से उतारी जाती है। बाद में इन सामग्रियों को स्थानीय बाजार में खपाया जाता है. यदि यह आरोप सत्य हैं, तो यह न केवल राजस्व की क्षति का मामला है, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
अनियंत्रित ठहराव से बढ़ रहा दुर्घटना का खतरा…….
स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल प्लाजा के आसपास भारी वाहनों का अनियंत्रित ठहराव आम हो गया है। सड़क किनारे अवैध रूप से खड़ी गाड़ियों के कारण मार्ग संकरा हो जाता है, जिससे यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। कई बार अचानक जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
टोल प्लाजा होने के कारण यहां वाहनों की गति स्वाभाविक रूप से धीमी रहती है या वे कुछ समय के लिए रुकते हैं। ऐसे में इस संवेदनशील स्थल के आसपास अवैध गतिविधियों का संचालन और भी चिंताजनक माना जा रहा है।
सामाजिक असुरक्षा की भावन गहराई…….
समाजसेवियों का दावा है कि संदिग्ध गतिविधियों और अवैध ठहराव के कारण क्षेत्र में चोरी की घटनाओं में वृद्धि हुई है। रात के समय बाहरी वाहनों और संदिग्ध लोगों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है। कुछ लोगों ने यह भी आशंका जताई है कि बीते महीनों में हुई सामाजिक घटनाओं की पृष्ठभूमि में इन गतिविधियों की भूमिका हो सकती है।
थाना से महज 5-6 किलोमीटर की दूरी…..
गौरतलब है कि यह क्षेत्र चांडिल थाना से लगभग 5 से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि थाना के इतने नजदीक होने के बावजूद कथित अवैध कारोबार कैसे निरंतर संचालित हो रहा है? क्या इन गतिविधियों को किसी प्रभावशाली संरक्षण का लाभ मिल रहा है? स्थानीय स्तर पर इस तरह की चर्चाएं तेज हैं कि बिना किसी ऊपरी संरक्षण के राष्ट्रीय राजमार्ग पर इस प्रकार का संचालन संभव नहीं है।
पूर्व में भी उठ चुका है मुद्दा……..
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस विषय पर पूर्व में भी खबरें प्रकाशित होती रही हैं, लेकिन उनका कोई ठोस असर नहीं दिखा। न तो अवैध ठहराव पर स्थायी रोक लगाई गई और न ही कथित संचालकों के विरुद्ध सार्वजनिक रूप से किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी दी गई।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग……
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि पाटा टोल प्लाजा के समीप संचालित कथित अवैध गतिविधियों की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो अविलंब इसे बंद कराया जाए तथा इसके पीछे सक्रिय लोगों और संरक्षण देने वालों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. अब देखना यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग की सुरक्षा, गरिमा और कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है, या यह मामला भी केवल आरोप-प्रत्यारोप और चर्चाओं तक सीमित रह जाएगा।
