JAMSHEDPUR / Srinath University : नौवां अंतर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिंदी महोत्सव 2025 रचनात्मकता, संस्कृति और तकनीक की सहयात्रा में दिसंबर 2025 में हिंदी की चमक लौहनगरी में एक बार फिर लौट रही है। 17, 18 और 19 दिसंबर को

आयोजित होने वाल े श्रीनाथ अंतर्राष्ट्रीय हिंदी महोत्सव तीन दिनों तक अनगिनत सांस्कृतिक और रचनात्मक अनुभवों से शहर को सराबोर कर देगा। इस खास आयोजन में साहित्य की खुशबू, संस्कृति की रौनक, शिक्षा और सृजन की नई उड़ान के साथ-साथ मन को छू लेने वाली संगीत प्रस्तुतियाँ सम्मिलित होंगी। यह ऐसा उत्सव है जहाँ हिंदी सिर्फ बोली नहीं जाती, बल्कि पूरे मनोयोग सरे आत्मसात की जाती है। दिनांक 17, 18 और 19 दिसंबर को आयोजित होने वाल े नौवां अन्तर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिन्दी महोत्सव अपने विकास की यात्रा में एक नए पड़ाव पर पहुँच चुका है। यह महोत्सव आज जिस ऊँचाई पर खड़ा है, वहाँ तक पहुँचने के
पीछे विद्यार्थियों, हिन्दी शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, कला-साधकों, तकनीकी विशेषज्ञों और सामाजिक-
राजनीतिक व्यक्तित्वों का निरंतर बढ़ता सहयोग रहा है। वर्षों पहले यह आयोजन एक छोटे से क्षेत्रीय मंच के रूप में आरंभ हुआ था, पर समय के साथ इसकी लोकप्रियता ऐसी बढ़ी कि अब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान बन चुकी है। आरंभिक चरणों में यह उत्सव केवल कोल्हान प्रमंडल के महाविद्यालयों तक सीमित था। उस समय प्रतियोगिताएँ भी सिर्फ अंतर महाविद्यालय स्तर पर ही होती थीं। धीरे-धीरे जब झारखण्ड के दूरस्थ इलाकों से युवा इसमें शामिल होने लगे, तब यह महोत्सव प्रदेश स्तरीय स्वरूप लेने लगा। ग्रामीण क्षेत्रों से विद्यार्थियों का उत्साह और उनके साथ आने वाले शिक्षकों का मार्गदर्शन, आयोजन के दायरे को और विस्तृत करता गया ।
साल 2021 में विश्वविद्यालय की स्थापना ने महोत्सव की दिशा ही बदल दी। पहली बार विद्यालय स्तर के
बच्चों को भी इस उत्सव का हिस्सा बनाया गया। किशोरवय प्रतिभाओं को जब अपने विचार, कल्पनाशक्ति और कौशल को मंच पर रखने का अवसर मिला, तब महोत्सव की ऊर्जा पहले से कहीं अधिक जीवंत होकर सामने आई। इस बदलाव ने हिन्दी महोत्सव को नई सोच, नई उमंग और नई प्रतिभाओं से समृद्ध कर दिया। आज का अन्तर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिन्दी महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भाषा और समाज के बीच सेतु का कार्य कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को हिन्दी साहित्य, भाषा और भारतीय मूल्यों तथा संस्कृति से सकारात्मक रूप से जोड़ना है ताकि नई पीढ़ी तकनीकी प्रगति के साथ-साथ अपनी भाषाई जड़ों से भी जुड़ी रहे ।
इस महोत्सव की आत्मा पाँच स्तम्भों पर टिकी हुई है साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, सृजन और संगीत हर वर्ष
आयोजित होने वाली सभी गतिविधियों और प्रतिस्पर्धाओं की रूपरेखा इन्हीं स्तम्भों पर आधारित होती है साथ ही पिछले कई वर्षों से एक थीम के साथ हिंदी महोत्सव की पूरी परिकल्पना तैयार की जा रही है। इस वर्ष नौवां अंतर्राष्ट्रीय हिंदी महोत्सव का थीम हिंदी साहित्य के नौ रस है । इस वर्ष महोत्सव इन्हीं नौ रसो पर आधारित है। जिसमें सभी प्रतियोगिताओं को इसी के आधार पर तैयार की गई है। हिंदी साहित्य भारतीय संस्कृति का दर्पण है इसमें जीवन के हर रंग हर भाव और हर अनुभव झिलमिलाते है। हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण अंग इसके नौ रस है जिसमें श्रृंगार रस, वीर रस, करुण रस, अदभूत रस, हास्य रस, रौद्र रस, भयानक रस, वीभत्स रस, शांत रस आदि हैं। प्रत्येक रस का अपना एक स्थाई भाव है इस वर्ष का महोत्सव इन्हीं रसो के स्थाई भाव पर आधिरित है।.-17, 18 और 19 दिसंबर का यह तीन दिवसीय आयोजन न सिर्फ कौशल प्रदर्शन का मंच है, बल्कि यह उन अनुभवों का उत्सव है जो भाषा को जीवित रखते हैं, संस्कृति को संवारते हैं, शिक्षा में नई दृष्टि देते हैं और सृजन को निरंतर आगे बढ़ाते हैं। यह महोत्सव उस समर्पित यात्रा का प्रतीक है जिसमें स्थानीय शुरुआत ने वैश्विक पहचान हासिल की और जिसमें हर वर्ष नई प्रतिभाएँ, नए विचार और नई उम्मीदें शामिल होती जा रही हैं।
हिंदी महोत्सव : एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक यात्रा
हिन्दी महोत्सव केवल एक वार्षिक कार्यक्रम भर नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवंत सांस्कृतिक यात्रा है, जहाँ भाषा अपनी पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर एक अनुभव, संवाद, कलात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक चेतना के रूप में उभरती है। आज के समय में, जब डिजिटल माध्यमों ने संचार की परिभाषाएँ बदल दी हैं और वैश्विक संस्कृति का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है, ऐसे में यह महोत्सव हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान, आकर्षण और नवीन प्रयोगधर्मिता का एक सशक्त मंच तैयार करता है। यहाँ भाषा केवल पढ़ाई या पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं रहती, बल्कि एक ऐसा सृजनात्मक अनुभव बन जाती है, जिसमें शब्दों के भीतर संवेदनाएँ, विचारों के भीतर दृष्टि और अभिव्यक्तियों के भीतर संस्कृति धड़कती है। कार्यक्रम के तीन दिनों के दौरान दर्शक विभिन्न विधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों का आनंद लेंगे। इन गतिविधियों में आधुनिक भारत के बदलते सामाजिक परिदृश्य, युवाओं की चुनौतियाँ, तकनीक के प्रभाव और संस्कृति के भविष्य से जुड़े विष
