जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत जमशेदपुर शहर के भुइयाँडीह स्थित इंद्रा नगर में रहने वाली गरीब महिला आरती गोराई के लिए बिजली बिल एक ऐसी परेशानी बन गया है, जिसने उसकी रोजमर्रा की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया है। सब्जी बेचकर परिवार का पेट पालने वाली आरती गोराई पर अचानक ₹60 हजार से अधिक का बिजली बिल थमा दिया गया, जिससे पूरा परिवार सदमे में है।

पीड़िता का बिजली बिल अकाउंट नंबर BHU-2902 बताया गया है। आरती गोराई का कहना है कि बीते दो वर्षों से वह बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं हुआ। कभी “अचानक मीटर रीडिंग बढ़ने” तो कभी “डोर लॉक” के नाम पर उनका बिजली बिल लगातार बढ़ता चला गया।
सबसे पीड़ादायक बात यह है कि जिस वक्त सरकार ने वर्ष 2024 के चुनाव से पहले गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बिजली बिल माफी की घोषणा की थी, उस श्रेणी में आने के बावजूद आरती गोराई को कोई राहत नहीं मिल सकी।

सब्जी बेचकर गुजर-बसर, बिल ने तोड़ दी कमर…..
आरती गोराई ने बताया कि वह रोजमर्रा सब्जी बेचकर जैसे-तैसे अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। इतनी बड़ी रकम का बिजली बिल भरना उनके लिए असंभव है। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, आवेदन दिया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
थक-हारकर पीड़िता ने विस्थापित नेता राकेश रंजन महतो से संपर्क किया और अपनी व्यथा सुनाई। मामले की जानकारी मिलते ही राकेश रंजन महतो स्वयं पीड़िता के घर पहुंचे और पूरे प्रकरण की स्थिति को समझा। उन्होंने बिजली बिल में अचानक हुई बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए पीड़िता को भरोसा दिलाया कि इसका समाधान जल्द कराया जाएगा।
सोशल मीडिया के बाद हरकत में आया विभाग…..
राकेश रंजन महतो द्वारा इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाए जाने के बाद बिजली विभाग हरकत में आया। विभाग के एसडीओ ने पीड़िता को आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर जल्द समाधान किया जाएगा और अगर गलती पाई गई तो बिल में सुधार होगा।
इस दौरान राकेश रंजन महतो ने कहा— “विस्थापित चाहे राज्य में हों या राज्य के बाहर, अगर उन पर अन्याय होगा तो मैं आवाज उठाऊंगा। गरीबों को इस तरह परेशान करना किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
गरीब की आवाज बनता सवाल……
आरती गोराई का मामला सिर्फ एक बिजली बिल का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां गरीब अपनी फरियाद लेकर सालों भटकता रहता है। अब देखना यह है कि विभागीय जांच के बाद पीड़िता को वास्तव में राहत मिलती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।
