स्वर्गीय कृष्णा कुमार का परिवार, जो गोलमुरी थाना क्षेत्र के गाढ़ाबासा लाइन नंबर–7, मकान संख्या 625 A में रहता है, खुद को असहाय, डरा हुआ और ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

















































⚡ मामला क्या है?…….
परिवार के घर के सामने नाला के बाद खाली पार्किंग की जगह को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। 30 दिसंबर 2025 को यह विवाद इस हद तक बढ़ गया कि स्वर्गीय कृष्णा कुमार के छोटे बेटे विजय कुमार की जान पर बन आई।
परिवार ने थाने में शिकायत की, उम्मीद थी कि कानून उनका साथ देगा। लेकिन सवाल उठता है —
“जब शिकायत हो जाए, तब भी अगर कार्रवाई न हो, तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां?”
परिवार ने मजबूरी में खुद की सुरक्षा के लिए बेरिकेटिंग कर दी।
घर के आगे 5 लोहे के पाइप
पीछे की ओर 3 पाइप
परिवार का साफ संदेश था……
“हम लड़ना नहीं चाहते, सिर्फ सुरक्षित रहना चाहते हैं।”
लेकिन यह सुरक्षा भी कुछ लोगों को रास नहीं आई।
🚨 14 जनवरी 2026 की कार्रवाई……
JUSCO की टीम पूरे दलबल के साथ पहुंची और बिना किसी संवेदनशीलता के बेरिकेटिंग को तोड़ दिया।
परिवार का आरोप है कि टीम ने कहा……
“आप यह नहीं कर सकते, हमें ऊपर जवाब देना पड़ेगा।”
अब सवाल यही उठता है……
क्या स्वर्गीय कृष्णा कुमार के परिवार से ही ‘ऊपर’ जवाब मांगा जाता है?
बाकी रसूखदारों के लिए नियम क्यों नहीं?
क्या कानून सिर्फ कमजोरों को दबाने के लिए है?
परिवार की आवाज़……
परिवार डर और गुस्से के बीच खुद से सवाल कर रहा है
“क्या हमारा गुनाह सिर्फ इतना है कि हम कमजोर हैं?”
“क्या हमें डर के साए में जीवन काटना होगा?”
“क्या अब यही विकल्प बचा है कि सब कुछ बेचकर यहां से पलायन कर जाएं?”
परिवार का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई दबाव और पैरवी के तहत की गई।……
🙏 मुख्यमंत्री ही आखिरी उम्मीद……
अब परिवार ने मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुँचाने का निर्णय लिया है।
परिवार का साफ कहना है…….
“अब मुख्यमंत्री ही हमारी आखिरी उम्मीद हैं। अगर वहां भी सुनवाई नहीं हुई, तो समझ लेंगे कि कमजोरों के लिए इस राज्य में कोई न्याय नहीं।”
❓ लोकतंत्र सवेरा के सवाल……..
क्या झारखंड में कानून सबके लिए बराबर है?
क्या रसूख और पहुंच के आगे आम आदमी की कोई कीमत नहीं?
क्या प्रशासन सिर्फ ताकतवरों की सुविधा के लिए काम कर रहा है?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, अब निगाहें आप पर हैं। क्या स्वर्गीय कृष्णा कुमार के परिवार को न्याय मिलेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?
लोकतंत्र सवेरा — आवाज़ उस सच की, जो दबाया जा रहा है।


