लोकतंत्र सवेरा | विशेष रिपोर्ट/जमशेदपुर : जिस विद्या की देवी माँ सरस्वती के सम्मान में शहर की गलियां गूंजनी चाहिए थीं भक्ति, संस्कार और सौहार्द से—वहीं उन्हीं गलियों में शोर, शराबा, चापड़ और पत्थर गूंजने लगे। माँ की विदाई के जुलूस में इंसानियत की विदाई क्यों? यही सवाल आज पूरे समाज के सामने खड़ा है।
“डीजे बंद करो…” से शुरू हुआ विवाद, पत्थरबाजी तक पहुंचा…..
बुधवार देर रात सोनारी थाना क्षेत्र के एरोड्रम चौक के पास सरस्वती पूजा विसर्जन के दौरान डीजे की तेज आवाज को लेकर दो बस्तियों—संबलपुरिया बस्ती और तरुण बाल संघ से जुड़े लोगों—के बीच तनातनी हो गई. पहले कहासुनी हुई… फिर आरोप-प्रत्यारोप चले… और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए।
“ये पूजा है या पावर दिखाने की होड़?” “डीजे की आवाज कम करो!” “हम भी पीछे नहीं हैं!”
बस, फिर क्या था— दोनों ओर से पत्थर चलने लगे, अफरा-तफरी मच गई, लोग जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे।
तीन घायल, एक की हालत गंभीर……
इस हिंसक झड़प में तीन लोग घायल हो गए। घायलों में जयंती नामक युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी को तत्काल इलाज के लिए टीएमएच में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार गंभीर रूप से घायल युवक की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
“माँ सरस्वती की विदाई में खून क्यों बहा?”
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तीन युवक हिरासत में……
घटना की सूचना मिलते ही सोनारी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर शांति व्यवस्था बहाल की गई. पुलिस ने तीन युवकों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि पत्थरबाजी में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
“कानून से ऊपर कोई नहीं!” — पुलिस का साफ संदेश
दोनों पक्षों की ओर से सोनारी थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एक और शर्मनाक तस्वीर : बर्मामाइंस में चापड़ से हमला……
इसी बीच बर्मामाइंस थाना क्षेत्र के ईस्ट प्लांट बस्ती से भी एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। सरस्वती पूजा विसर्जन के दौरान डांस कर रहे दो युवकों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि एक युवक ने दूसरे के सिर पर चापड़ से वार कर दिया. घायल युवक सुजीत कुमार को गंभीर हालत में सदर अस्पताल पहुंचाया गया. आरोपी घटना के बाद फरार हो गया है। पुलिस ने उसके खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
“भक्ति के नाम पर बर्बरता कब तक?”
लोकतंत्र सवेरा का सवाल……
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क्या पूजा अब प्रतियोगिता बन गई है?
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क्या डीजे, भीड़ और दबदबा ही भक्ति का पैमाना रह गया है?
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क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ी को यही संस्कार दे रहे हैं?
“माँ सरस्वती विद्या देती हैं, हथियार नहीं, माँ शांति सिखाती हैं, पत्थरबाजी नहीं।
समय आ गया है आत्ममंथन का वरना त्योहार बचेंगे नहीं— और समाज सिर्फ खबरों की सुर्खियों में जलता रहेगा।
