जमशेदपुर : 20 जनवरी 2026 को जुस्को श्रमिक यूनियन के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन (ILO) एवं इंटक के संयुक्त तत्वावधान में लिंग समानुपात पर एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में महिलाओं के अधिकार, समान अवसर और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यशाला के मुख्य अतिथि झारखंड इंटक के प्रदेश अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय एवं विशिष्ट अतिथि रघुनाथ पांडेय रहे। दोनों अतिथियों का स्वागत झारखंड इंटक की संगठन सचिव एवं कार्यशाला की संगठनकर्ता शिखा चौधरी ने पुष्पगुच्छ देकर किया।

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राकेश्वर पांडेय ने कहा कि बड़ी-बड़ी कंपनियों में इस तरह की कार्यशालाएं तो होती हैं, लेकिन असंगठित क्षेत्र में ऐसी पहल बहुत कम देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यशाला के आयोजन से असंगठित क्षेत्र की महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगी, जिससे एक सशक्त और समान समाज का निर्माण संभव होगा।

विशिष्ट अतिथि रघुनाथ पांडेय ने कहा कि आने वाले समय में इंडस्ट्री और कार्यस्थलों पर महिलाओं की भूमिका और भी मजबूत होगी। महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला से जुड़ते हुए इंटक की राष्ट्रीय सचिव शहनाज रफीक ने कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और उत्पीड़न को रोकने हेतु राष्ट्रीय विधायी ढांचे पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने कानून बनाए हैं और उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करवाना जनप्रतिनिधियों और नेताओं की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में टाटा स्टील की पूर्व मुख्य मानव संसाधन पदाधिकारी दीपा वर्मा ने कहा कि समाज तेजी से बदल रहा है और महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि अब समाज में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव काफी हद तक कम हुआ है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
वक्ता के रूप में झारखंड इंटक के सचिव शैलेश पांडेय ने कहा कि संगठित होकर ही अपने हक और अधिकार प्राप्त किए जा सकते हैं, इसलिए मजदूरों और महिलाओं को एकजुट होना चाहिए।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन इंटक नेत्री मीरा तिवारी ने किया। कार्यशाला के दौरान पुरुषों और महिलाओं ने समूह बनाकर ग्रुप डिस्कशन के माध्यम से लिंग समानुपात और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यशाला का समापन एक सकारात्मक संदेश के साथ हुआ कि जागरूकता और सहभागिता से ही समानता और सशक्तिकरण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
