- दुमका के दिसोम सोहराय में शामिल हुए पूर्व सीएम चम्पाई सोरेन
- चम्पाई सोरेन ने पेसा एवं राज्य सरकार की आदिवासी विरोधी नीतियों के खिलाफ युवाओं को एकजुट होने का आह्वान किया
दुमका : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन आज दुमका पहुंचे, जहां उन्होंने दिसोम मांझी थान में सिर नवा कर, आदिवासी अस्मिता एवं अस्तित्व की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। उसके बाद पूर्व सीएम एस पी कॉलेज में आयोजित “दिसोम सोहराय” में भाग लेने पहुंचे। कार्यक्रम स्थल से करीब एक किलोमीटर पहले उनके स्वागत हेतु हजारों लोग जुटे थे, जहां से वे उनके साथ पैदल ही आगे बढ़ गए।


उस वक्त भीड़ में रोमांच की लहर दौड़ गई, जब साथ चल रहे कलाकारों से उन्होंने मांदर लिया, और उनके साथ ताल से ताल मिलाकर झूमने लगे। हजारों की भीड़ के साथ वे धीरे-धीरे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। वहां पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया गया अपने संबोधन की शुरुआत पूर्व सीएम ने संथाल परगना से जुड़े वीरों के बलिदान को याद कर की, तत्पश्चात उन्होंने सोहराय समेत संथाल आदिवासी समाज के विभिन्न पर्व-त्योहारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हजारों वर्षों से चली आ रही इन परंपराओं को संरक्षित एवं संवर्धित कर, उन्हें अगली पीढ़ी को सौंपना हम सबकी साझी जिम्मेदारी है।
अपने वक्तव्य में उन्होंने राज्य सरकार पर पेसा नियमावली के नाम पर आदिवासियों को धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पेसा अधिनियम 1996 राज्यों की स्पष्ट तौर पर रूढ़िजन्य विधि, सामाजिक एवं धार्मिक प्रथाओं तथा संसाधनों के परंपरागत प्रबंध पद्धतियों के अनुरूप नियमावली बनाने का निर्देश देता है, लेकिन झारखंड सरकार की नियमावली से ये विषय गायब हैं।
उन्होंने कहा कि पेसा का मूल मकसद आदिवासी समाज की रूढ़िजन्य परंपराओं एवं पुरातन काल से चले आ रहे उनके स्वशासन व्यवस्था को संवैधानिक संरक्षण एवं विस्तार देना है, लेकिन यहां राज्य सरकार वैसे लोगों को लाभ देना चाहती है, जो हमारी परंपराओं को पहले ही छोड़ चुके हैं।
पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि पहले टीएसी और अब पेसा से राज्यपाल को बाहर कर, उनकी जगह सारे अधिकार उपायुक्त को दिए जा रहे हैं, ताकि सरकार पूरी व्यवस्था पर अपना नियंत्रण रख सके। यह पेसा की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि नियमावली में ग्राम सभाओं के अधिकारों में जिस प्रकार कटौती हुई है, वह अक्षम्य है।
पूर्व सीएम चम्पाई सोरेन ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान बनी नियमावली में ना सिर्फ रूढ़िजन्य परंपराओं एवं धार्मिक प्रथाओं का जिक्र था, बल्कि उनमें सीएनटी-एसपीटी एक्ट के उल्लंघन के मामलों में ग्राम सभा को जमीन वापस करवाने का अधिकार भी दिया गया था। इसके अलावा उसमें शेड्यूल एरिया की जमीन के हस्तांतरण से पहले डीसी को ग्राम सभा से मंजूरी लेने का भी प्रावधान था।
पूर्व सीएम ने बताया कि झारखंड की महागठबंधन सरकार पेसा को कमजोर कर के, झारखंड के आदिवासियों का अस्तित्व खतरे में डाल रही है। पहले से ही बांग्लादेशी घुसपैठियों एवं धर्मांतरण की दोहरी मार झेल रहे आदिवासी समाज को पेसा से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन इस नियमावली ने उन सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वे पारंपरिक ग्राम प्रधानों के बीच, इस नियमावली को फाड़ कर फेंक देंगे।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि वे महागठबंधन सरकार के आदिवासी विरोधी रवैए के खिलाफ गाँव- गाँव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे। युवाओं को एकजुट होने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि जिस जल- जंगल- जमीन की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों से बलिदान दिया, उसके लिए, इस वीर भूमि से फिर एक बार, बड़ा आंदोलन होगा।
संथाल परगना में सोहराय के इस सबसे बड़े आयोजन में आदिवासी समाज के कई साहित्यकार, शिक्षाविद, समाजसेवी एवं लाखों की संख्या में आम लोग शामिल हुए।
