लातेहार : खुशियों से भरी एक बस, जिसमें शादी के गीत, हंसी और उम्मीदें गूंज रही थीं… लेकिन ओरसा घाटी में वह सफर चीख-पुकार, खून और मातम में बदल गया. रविवार दोपहर करीब तीन बजे महुआडांड़ स्थित ओरसा घाटी में एक दर्दनाक हादसा हो गया। ब्रेक फेल होने से अनियंत्रित बस गहरी खाई में पलट गई। इस भयावह दुर्घटना में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 82 यात्री घायल हो गए।

क्षमता 52, सवार थे 90 से ज्यादा……
हादसे का एक बड़ा कारण बस का अत्यधिक ओवरलोड होना बताया जा रहा है।
बस की क्षमता : 52 सवारी
बस में मौजूद लोग : 90 से अधिक
बस में बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और युवा सभी सवार थे। सभी लोग छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के महाराजगंज गांव से महुआडांड़ के लोध गांव शादी में छेका रस्म में शामिल होने जा रहे थे।
💔 पल भर में उजड़ गईं कई खुशियां…..
हादसे में जिन लोगों की जान गई, उनमें कई परिवारों के एकमात्र सहारे भी शामिल थे।
मृतकों में शामिल हैं—
रेशांति देवी (35), प्रेमा देवी (37), सीता देवी (45), सोनमती देवी (45), सुखना भुइयां (40), विजय सिंह (32) सहित अन्य कुछ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि चार लोगों ने इलाज के दौरान अस्पताल में आखिरी सांस ली।
घटनास्थल पर मचा कोहराम……
हादसे के बाद घाटी में घायलों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया।
स्थानीय लोगों ने जान की परवाह किए बिना रेस्क्यू शुरू किया।
घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद लातेहार, गुमला, रांची रेफर किया गया। कई की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़…..
जैसे-जैसे मौत की खबर गांवों तक पहुंची,
घरों में चूल्हे ठंडे पड़ गए, मां-बाप बेसुध हो गए, और बच्चों की आंखें अपने अपनों को ढूंढती रह गईं। शादी का निमंत्रण लेकर निकले लोग अर्थी बनकर लौटे, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।
सवालों के घेरे में प्रशासन…..
क्या ओवरलोड बस पर कार्रवाई होती तो हादसा टल सकता था?
पहाड़ी इलाकों में बसों की तकनीकी जांच क्यों नहीं?
आखिर कब सबक लेगा सिस्टम?…..
ओरसा घाटी का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और मानव जीवन की अनदेखी की दर्दनाक कहानी बन गया है।
🕯️ ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दे और घायलों को शीघ्र स्वस्थ करे यह हादसा हमें फिर याद दिलाता है— लापरवाही की कीमत अक्सर ज़िंदगी होती है।
