सिल्ली : 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन नदी जाकर श्रद्धांजलियों ने अपने पूर्वजों के नाम किया और टुसू मनी को जल में विसर्जन कर नमन किया। टुसू मनी मां को जल में विदा किया। ज्ञात हो की टुसू मां की स्थापना अगह्न संक्रान्ति के दिन की जाती है। 1 माह तक गीत गाकर टुसु मां का आराधना की जाती है मौके पर स्वर्णरेखा ,राढू ,कांची ,दामोदर नदी, आदि नदियों के किनारे कई जगह मेले का आयोजन भी होते है। यह पर्व उल्लास के साथ मनाया जाता है मकर संक्रांति कुड़माली वर्ष का अंतिम दिन है।
पहले माघ कृषियों के लिए हर्ष का दिन है। इसी दिन सूर्य देवता का उत्तरायण होता है। जो कृषि के लिए उपकारी होता है। कुड़माली संस्कृति में इसे आखाईन यात्रा कहा जाता हैं। आज के दिन किसान अपने खेत में हल चलाते हैं और गोबर डिग में गोबर काटाई करते हैं। यह दिन किसानों के लिए नववर्ष का प्रथम दिन है। माघ मास में रिश्तेदारों के वहां पिठा पहुंचनें का रिवाज है। शादी जैसे शुभ कार्यों का प्रारंभ भी इसी महीने से होता है।
फसल की कटाई के बाद मकर पर्व और खेती की शुरुआत के लिए हार पुन्हा पहला माघ यानी वर्ष के प्रथम दिन किया जाता है।इसकी जानकारी चण्डी प्रसाद महतो ने दी।
रिपोर्टर: रिंकी कुमारी
