बोकारो/झारखंड : रोजगार की तलाश में बोकारो से सुदूर बेंगलुरु गए एक प्रवासी मजदूर की अचानक दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर इस परिवार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मृतक के पार्थिव शरीर को वापस अपने पैतृक गांव लाने की है। संसाधनों के अभाव में बेबस परिजनों ने राज्य सरकार, स्थानीय जिला प्रशासन और सामाजिक संगठनों से मदद की गुहार लगाई है।



अधिकारियों और सरकार से अपील:
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने मुख्यमंत्री, स्थानीय विधायक और बोकारो जिला प्रशासन से मांग की है कि बेंगलुरु प्रशासन से संपर्क कर शव को जल्द से जल्द झारखंड लाने की व्यवस्था की जाए, ताकि मृतक का अंतिम संस्कार उनके अपने गांव में रीति-रिवाज के साथ हो सके।
त्वरित सहायता के लिए कुछ व्यावहारिक कदम
अगर आप इस मामले में आधिकारिक तौर पर पैरवी कर रहे हैं, तो इन माध्यमों से तुरंत मदद मिल सकती है:
- झारखंड प्रवासी नियंत्रण कक्ष (Jharkhand Migrant Control Room): झारखंड सरकार का श्रम विभाग प्रवासियों के लिए एक विशेष हेल्पलाइन चलाता है। आप उनके आधिकारिक नंबरों या सोशल मीडिया (X/Twitter) हैंडल पर इस मामले को टैग कर सकते हैं।
- बेंगलुरु में झारखंड समाज/झारखंड एसोसिएशन: बेंगलुरु में सक्रिय झारखंड के स्थानीय प्रवासी संगठनों से संपर्क करने पर वे अस्पताल, पुलिस और कागजी कार्रवाई में जमीन पर तुरंत मदद पहुंचा सकते हैं।
- ट्विटर/X पर अपील: इस खबर को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO Jharkhand), श्रम मंत्री और बोकारो उपायुक्त (DC Bokaro) को टैग करते हुए पोस्ट करने से प्रशासन अक्सर बहुत तेजी से एक्शन लेता है।




