रांची | रांची की मौलाना आज़ाद कॉलोनी एक बार फिर दर्दनाक हादसे की गवाह बनी। खेलते-खेलते खुले नाले में गिरने से दो मासूम बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ गई। मां ने अपनी जान की परवाह किए बिना नाले में छलांग लगाकर एक बच्चे को तो बचा लिया, लेकिन दूसरा मासूम नाले के तेज बहाव में बह गया और उसकी मौत हो गई।

















































मंगलवार दोपहर कॉलोनी की गली नंबर-7 में बच्चे हमेशा की तरह खेल रहे थे। अचानक पैर फिसलने से दोनों भाई खुले नाले में जा गिरे। बच्चों को गिरता देख मां की चीख निकल पड़ी। आसपास के लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही मां नाले में कूद पड़ी। उसने बड़ी मुश्किल से एक बच्चे को बाहर निकाला, लेकिन दूसरा बच्चा उसकी आंखों के सामने ही पानी में ओझल हो गया।
स्थानीय लोगों ने बच्चे को बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन नाले में जमा गंदगी और तेज बहाव के कारण काफी देर बाद बच्चा झाड़ियों में फंसा मिला। आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुरानी मांग, नया हादसा……..
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। करीब 18 साल पहले इसी नाले में एक युवक की बहने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद आज तक नाले को ढकने या सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। लोग कई बार गार्डवाल और ढक्कन बनाने की मांग करते रहे, लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
लापरवाही पर सवाल……..
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक मासूमों की जान जाती रहेगी? क्या हर हादसे के बाद सिर्फ बयानबाजी ही होगी? अगर समय रहते नाले को ढक दिया गया होता, तो शायद आज एक मां अपनी गोद उजड़ने का दर्द न सहती।
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक कड़ा तमाचा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस घटना से सबक लेता है या अगली खबर के इंतजार में एक और मासूम की बलि चढ़ेगी।





