राँची। उत्पाद सिपाही नियुक्ति परीक्षा में पेपर लीक के प्रयास ने अब एक बड़े संगठित रैकेट का रूप ले लिया है। गुरुवार देर रात सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक ने रांची एसएसपी कार्यालय में हाईलेवल समीक्षा बैठक कर पूरे केस की प्रगति जानी और एसआईटी को कई अहम दिशा-निर्देश दिए।
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बैठक में एसएसपी राकेश रंजन समेत तमाम वरीय अधिकारी मौजूद रहे। इस मामले में अब तक 166 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि जांच में सामने आ रहे तथ्यों ने यह साफ कर दिया है कि यह कोई साधारण गिरोह नहीं था, बल्कि संगठित नेटवर्क था, जो अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लेकर उन्हें परीक्षा में सफल कराने की गारंटी देता था। अब इस पूरे गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, उनकी तलाश भी शुरू कर दी गई है।
जांच में इस नेटवर्क के तार बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं। कई आरोपी दूसरे राज्यों से आकर इस गिरोह के लिए काम कर रहे थे। समीक्षा के दौरान एडीजी ने फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की गहराई से जांच, मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी और नेटवर्क के पूरे ढांचे को तोड़ने पर जोर दिया है। पुलिस की अभी जांच जारी है और कई अहम आरोपियों की गिरफ्तारी बाकी है।
आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह कई स्तरों पर काम कर रहा था। सरगना स्तर पर पूरा नेटवर्क संचालित होता था, जबकि मिडिलमैन अभ्यर्थियों से संपर्क कर डील फाइनल करते थे।
सॉल्वर गैंग परीक्षा में सवाल हल करने और टेक्निकल टीम डिजिटल माध्यम से उत्तर पहुंचाने का काम करती थी। गिरोह ने पास कराने के लिए रेट भी तय कर रखा था। अभ्यर्थियों से 10 लाख रुपए पर सौदा तय हुआ था। पहले 3 लाख रुपए एडवांस लिए गए थे। पुलिस को मोबाइल और व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल और ट्रांजेक्शन के कई सबूत मिले हैं। चैट में पेपर सेट, फाइनल आंसर भी मिले हैं, जिसकी जांच की जा रही है।