रांची : जगन्नाथपुर मौसीबाड़ी के मल्लार कोचा से लापता अंश और अंशिका का मंगलवार को 5 वें दिन भी कोई सुराग नहीं मिला। एस्बेस्टस के मकान में रहने वाली नीतू के पति संजू यादव दूध का कारोबार करते हैं। मंगलवार को एसएसपी, सिटी एसपी सहित कई पुलिस अधिकारी पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और जानकारियां ली। रांची पुलिस की ओर से मंगलवार को हाउस सर्च अभियान चलाया गया। हटिया डीएसपी के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने मल्लार कोचा जगन्नाथपुर खटाल में स्थित एक-एक घर की तलाशी ली। पुलिस की टीम ने स्थानीय लोगों से बच्चों के बारे में पूछताछ भी की।

पुलिस को संदेह है कि क्षेत्र के लोग ही बच्चों को छुपाकर अपने घर में रखे हुए हैं। हालांकि, कई घरों की तलाशी के बाद भी पुलिस को बच्चे नहीं मिले। एसएसपी और ग्रामीण एसपी भी बच्चों के परिजनों से मिले और उन्हें आश्वासन दिया कि वे जल्द ही दोनों बच्चों को सकुशल बरामद कर लेंगे। बच्चे के पिता सुनील ने बताया कि बच्चों की कोई जानकारी नहीं मिली है। पूरा परिवार परेशान है। उनकी किसी से कोई दुश्मनी और विवाद नहीं है। पिता ने आरोप लगाया कि घटना के बाद पुलिस अगर गंभीर होती तो शायद उनका बच्चा अब तक मिल गया होता। पुलिस चौथे दिन गंभीर हुई है और तत्परता से खोजबीन शुरू की है।
धरना पर बैठे लोग, आश्वासन पर हटे दूसरी ओर, आक्रोशित परिजन और स्थानीय लोग मंगलवार को सड़क पर उतर आए। धुर्वा शहीद मैदान शेख भिखारी चौक के पास धरना दिया। धरने में दोनों बच्चों के पिता सुनील यादव और मां नीतू देवी भी पहुंचीं। नीतू भले ही धरना पर बैठीं, लेकिन निगाहें अपने बच्चों को तलाश रही थी। एक बार वह बेहोश होकर गिर पड़ीं तो लोगों ने संभाला। धरना स्थल पर जुटे लोगों ने प्रशासन से बच्चों को अविलंब सुरक्षित बरामद करने की मांग की। राष्ट्रीय जनता दल के नेता कैलाश यादव ने कहा कि शीघ्र बच्चों की बरामदगी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हालांकि, एसएसपी राकेश रंजन, ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर और डीएसपी पीके मिश्रा के आश्वासन के बाद लोग धरने से हटे।
मां खुद को कोस रही- बिस्कुट लाने नहीं भेजता तो बच्चे साथ होते मां के आंसू थम नहीं रहे हैं। मां नीतू मंगलवार को अपने घर में बैठी थीं, लेकिन निगाहें दरवाजे पर ही थी। मंगलवार को जब भी कोई घर में आता तो नीतू दौड़ते हुए दरवाजे के बाहर देखने आ जाती कि उनके बच्चे लौटे हैं या नहीं। नीतू घर आए लोगों से पूछती हैं कि उनके बच्चे का कुछ पता चला या नहीं। कोई जवाब नहीं मिलने पर फूट-फूटकर रोने लगीं। मां ने कहा कि उनके बच्चों ने किसी का क्या बिगाड़ा था।
आसपास के लोग और रिश्तेदार उन्हें दिलासा देते रहे कि भगवान पर भरोसा रखो, दोनों बच्चे जल्द मिल जाएंगे। इसके बाद नीतू शांत होकर चौंकी पर बैठ गई, मगर उनकी आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। नीतू ने कहा कि काश दोनों बच्चों को वह बिस्कुट लाने के लिए दुकान नहीं भेजते तो बच्चे आज उनके साथ ही रहते। रोते हुए नीतू भगवान से अपने बच्चों को लौटाने की गुहार लगा रही थी। यह दृश्य देखकर न सिर्फ रिश्तेदार बल्कि पड़ोसियों की भी आंखें नम हो गईं। नीतू की हालत ऐसी है कि वह न तो ठीक से खाना खा पा रही है और न ही सो रही है। वे कह रही हैं कि बच्चों ने तो खाना नहीं खाया होगा।
51 हजार इनाम की घोषणा रहस्मय तरीके से गायब दो मासूम भाई-बहन की खोज में रांची पुलिस का पूरा महकमा लगा हुआ है, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी दोनों बच्चों का कोई सुराग तक नहीं मिल पाया है। रांची पुलिस ने बच्चों को खोज निकालने के लिए इनाम की राशि की घोषणा भी कर दी है। बच्चों का पता बताने वाले को 51 हजार की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। बच्चों की तस्वीर और पुरस्कार राशि के साथ रांची के विभिन्न इलाकों में पोस्टर चस्पा किए गए हैं।
