- हर महीने शिक्षा विभाग से लेता था तनख्वाह
- वांटेड पर पुलिस ने घोषित कर रखा था 1 लाख का ईनाम, इनकाउंटर के बाद हुआ खुलासा
छत्तीसगढ़ : नक्सलियों से जुड़ी एक बड़ी ही चौकाने वाली खबर है। खबर मिली है कि नक्सली संगठन से जुड़े कई उग्रवादी, सरकारी कार्यालयों में भी पदस्थ हैं। उन्हें हर महीने सैलरी भी मिल रही है। इस बात का खुलासा तब हुआ, जब एक इनकाउंटर में 7 नक्सली ढेर कर दिये गये। इस मुठभेड़ में दो टॉप कमांडर सहित 7 उग्रवादी शामिल थे।
पुलिस ने जब मारे गये नक्सलियों की शिनाख्त की, तो मारे गए माओवादियों में दो शीर्ष नेता (Top Leaders) शामिल हैं, जिनकी पहचान गौतम उर्फ सुधाकर (Gautam alias Sudhakar) और भास्कर राव (Bhaskar Rao) के रूप में हुई है। इन दोनों पर 40 लाख और 45 लाख रुपये का ईनाम था। वहीं मुठभेड़ में एक और नक्सली मारा गया, जिसका नाम महेश कोडियम था। बताया जा रहा है कि वो स्कूल में कार्यरत था। उसे हर महीने शिक्षा विभाग की तरफ से मानदेय भी मिलता था। इस साल मार्च तक उसे सैलरी दी गयी थी। जानकारी के मुताबिक महेश रसोई सहायक के रूप में कार्यरत था।
पुलिस ने दावा किया है कि मारे गए अन्य नक्सलियों में से एक की पहचान महेश कोडियम (Mahesh Kodiam) के रूप में हुई है, जो फरसगढ़ थाना अंतर्गत इरपागुट्टा गांव (Irapagutta Village) का निवासी था। चौंकाने वाली बात यह है कि महेश गांव के प्राथमिक विद्यालय में रसोई सहायक (School Cook Assistant) के रूप में कार्यरत था और मार्च 2025 तक उसे नियमित मानदेय भी मिल रहा था। जांच में यह सामने आया है कि महेश कोडियम, नेशनल पार्क क्षेत्र डिवीजन के अंतर्गत सक्रिय माओवादी संगठन का पार्टी सदस्य था। अब यह जांच का विषय है कि वह गौतम और भास्कर जैसे शीर्ष माओवादी नेताओं के संपर्क में कैसे आया।
हालांकि सूत्र बताते हैं कि सिर्फ महेश ही नहीं, और भी कई ऐसे उग्रवादी है, जो नक्सल संगठन में रहते हुए अलग-अलग जगहों पर दिखावे के लिए काम कर रहे हैं। ये नक्सलियों के लिए काम करते हैं और वेतन सरकार से लेते हैं। पुलिस की तरफ से हुए खुलासे के बाद हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस इस मामले में काफी सतर्कता से जांच कर रही है।
