चेन्नई / नई दिल्ली : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार से मांग की है कि देश में नीट परीक्षा को पूरी तरह से समाप्त किया जाए और राज्यों को उनके अपने अधिकार वापस दिए जाएं।



12वीं के अंकों के आधार पर हो एडमिशन : मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा है कि एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS) और आयुष (AYUSH) जैसी महत्वपूर्ण मेडिकल सीटों को भरने की अनुमति राज्यों को दी जानी चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राज्यों को 12वीं कक्षा (इंटरमीडिएट) में प्राप्त अंकों के आधार पर ही मेडिकल कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया संचालित करने की आजादी मिले।
अमीर बनाम गरीब की लड़ाई : केंद्र सरकार को घेरे में लेते हुए सीएम विजय ने तर्क दिया कि मौजूदा नीट व्यवस्था देश के गरीब और ग्रामीण इलाकों के होनहार बच्चों के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने कहा, “नीट परीक्षा का सीधा फायदा केवल उन अमीर और शहरी छात्रों को मिल रहा है जो महंगे कोचिंग सेंटर्स का भारी-भरकम खर्च उठाने में सक्षम हैं। इसके कारण गांवों के प्रतिभाशाली छात्र योग्यता होने के बावजूद डॉक्टर बनने से वंचित रह जा रहे हैं।”
पेपर लीक से टूटा भरोसा : हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आई नीट पेपर लीक और धांधली की घटनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विवादों ने पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को खत्म कर दिया है। अब छात्रों और अभिभावकों का इस परीक्षा से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। ऐसे में इस व्यवस्था को जारी रखना लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
आगे की राह : तमिलनाडु सरकार का यह रुख नया नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री विजय के इस कड़े बयान के बाद देश में ‘एक राष्ट्र, एक परीक्षा’ के मॉडल और राज्यों की स्वायत्तता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि इस पर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की क्या प्रतिक्रिया आती है।



