नई दिल्ली : भारत का अंतरिक्ष मिशन एक बार फिर बड़ी उड़ान भरने के लिए तैयार है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 4 सितंबर को तड़के 2:55 बजे EOS-5 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को GSLV-F17 रॉकेट से अंतरिक्ष में लॉन्च करने की तैयारी में है। यह मिशन श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से रवाना किया जाएगा।

EOS-5 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह जियोसिंक्रोनस कक्षा से भारत की सीमाओं, समुद्री क्षेत्र, मौसम प्रणालियों और आपदा संभावित इलाकों पर लगातार निगरानी में मदद कर सके। हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग तकनीक से लैस यह उपग्रह देश की निगरानी और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
करीब 2,367 किलोग्राम वजन वाले EOS-5 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया जाना है। मिशन सफल रहने पर जियोसिंक्रोनस कक्षा से काम करने वाले इमेजिंग सैटेलाइट के जरिए भारत की अर्थ ऑब्जर्वेशन क्षमता को नई मजबूती मिलेगी। मिशन में इस्तेमाल होने वाला GSLV-F17 करीब 51.7 मीटर लंबा और 420.5 टन वजनी है। रॉकेट में तीन चरणों वाली तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके पहले चरण में S-139 सॉलिड रॉकेट मोटर और चार लिक्विड स्ट्रैप-ऑन बूस्टर, दूसरे चरण में लिक्विड इंजन और अंतिम चरण में स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज शामिल है।
यह लॉन्च ISRO के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है। लगातार दो PSLV मिशनों की असफलताओं के बाद लगभग आठ महीने के अंतराल पर होने वाला यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण वापसी के तौर पर देखा जा रहा है।
