मुंबई : बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर मनोज कुमार का निधन हो गया है. उन्होंने 87 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली, वे मुंबई के कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल में भर्ती थे. अपने करियर में ज्यादातर देशभक्ति पर आधारित फिल्में करने के कारण फैंस उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से बुलाते थे. उन्होंने ‘क्रांति’, ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’ जैसी फिल्मों में काम किया है.
हरिकृष्ण से बने मनोज कुमार
दादा साहब फाल्के पुरुस्कार से सम्मानित दिग्गज अभिनेता का मुंबई के कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी में अस्पताल निधन हुआ. कुमार का जन्म 1937 में खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान के छोटे से शहर एबटाबाद (तब भारत का हिस्सा) में हुआ था. उनका नाम हरिकृष्णन गोस्वामी था. उन्होंने 1957 में फिल्म ‘फैशन’ से मनोरंजन की दुनिया में कदम रखा.
फिल्म ‘फैशन’ से फिल्मी दुनिया में अपने सफर की शुरुआत करने वाले मनोज कुमार को 1965 में फिल्म ‘शहीद’ से बड़ा ब्रेक मिला. जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. सिर्फ फिल्में ही नहीं उनके गाने भी लोगों की जुबान पर चढ़े. चाहे वह फिल्म ‘उपकार’ का ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’ हो या ‘पूरब और पश्चिम’ का ‘भारत का रहने वाला हूं’ हो आज भी बच्चा-बच्चा गुनगुनाता है.
हरिकृष्णन से कैसे बने मनोज कुमार
मनोज कुमार का जन्म 1937 में पाकिस्तान के एक छोटे शहर में हुआ था. स्वतंत्रता के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया. उनका नाम हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी था लेकिन फिल्म ‘शबनम’ में दिलीप कुमार का किरदार उन्हें इतना पसंद आया कि उसी के नाम पर उन्होंने अपना नाम मनोज कुमार रख लिया.
फैंस ने रखा भारत कुमार नाम
मनोज कुमार को फैंस प्यार से भारत कुमार बुलाते हैं इसकी वजह अपने करियर में उन्होंने देशभक्ति पर आधारित कई फिल्मों में काम किया. उनकी बेहतरीन फिल्मों में ‘शहीद’, ‘हिमालय की गोद में’, ‘पत्थर के सनम’, ‘उपकार’, ‘नील कमल’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘मेरा नाम जोकर’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘क्रांति’, ‘मुझे इंसाफ चाहिए’ शामिल है. उनकी आखिरी फिल्म ‘मैदान-ए-जंग’ थी
दादा साहब फाल्के अवार्ड से हुए सम्मानित
एक्टर के अलावा वे बेहतरीन डायरेक्टर भी थे. उन्होंने ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘क्रांति’ जैसी फिल्मों को डायरेक्ट किया था. मनोज कुमार को 1992 में पद्म श्री से नवाजा गया था. उन्हें उपकार फिल्म के लिए 1968 में सेकंड बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवार्ड मिला था. साल 2016 में वे दादा साहब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किए गए.