जमशेदपुर। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत को लेकर आजसू नेता कमलेश दुबे ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों के अनुसार भरत भूषण तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो उसके बाद हुई गोलीबारी कानून और संविधान की मूल भावना पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

जारी बयान में कमलेश दुबे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति को दंडित करने का अधिकार केवल न्यायालय को है। किसी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, न कि कथित मुठभेड़ों के माध्यम से। उन्होंने कहा कि यदि आत्मसमर्पण की स्थिति में किसी व्यक्ति की जान जाती है, तो यह मामला केवल एक मौत का नहीं बल्कि कानून के शासन और मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे घटनाक्रम आम जनता के बीच पुलिस और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं। इसलिए आवश्यक है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त एवं उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए।
कमलेश दुबे ने कहा कि समाज और सरकार की जिम्मेदारी केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि युवाओं को अपराध की दुनिया से बाहर निकालकर मुख्यधारा से जोड़ना भी है। यदि किसी आरोपी ने आत्मसमर्पण किया है तो उसे कानून के दायरे में रखते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। कानून से ऊपर कोई नहीं है और वर्दी पहनने वाला भी संविधान की सीमाओं के भीतर ही कार्य करने के लिए बाध्य है।
उन्होंने कहा कि किसी परिवार का जवान बेटा इस प्रकार असमय काल के गाल में समा जाए, यह अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। सरकार को चाहिए कि मामले की सच्चाई सामने लाकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए तथा दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई सुनिश्चित करे, जिससे भविष्य में कोई भी कानून को अपने हाथ में लेने का साहस न कर सके।
