जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित सीटों पर कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। युवा जदयू के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी शिक्षा विभाग के कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जिले में आरटीई के तहत गरीब वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित लगभग 2300 सीटों पर आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों के बच्चों का नामांकन कराया जा रहा है। संगठन का आरोप है कि शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारी, जो लंबे समय से एक ही पद एवं कार्य में कार्यरत हैं, इस पूरे मामले में संलिप्त हैं।
युवा जदयू ने ज्ञापन में कई गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रथम लॉटरी में 25 से 30 विद्यालयों की आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर पूरी तरह लॉटरी नहीं कराई गई। संगठन ने इसकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि प्रथम सूची जारी होने के बाद नियमानुसार केवल रिक्त सीटों के अनुरूप दूसरी लॉटरी होनी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने सभी अभ्यर्थियों से दोबारा विद्यालय का विकल्प भरवाया, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ गई और कथित रूप से मनचाहे अभ्यर्थियों का चयन कराया गया।
ज्ञापन में आय प्रमाण पत्रों की सत्यता पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि अंचल कार्यालय द्वारा किसी भी आय प्रमाण पत्र का भौतिक सत्यापन नहीं किया गया, फिर भी 72 हजार रुपये वार्षिक आय दर्शाने वाले प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इसकी भी जांच की मांग की गई है।
युवा जदयू ने यह भी आरोप लगाया कि द्वितीय लॉटरी से पहले जिन विद्यालयों के नाम ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध नहीं थे, उन विद्यालयों में भी शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से नामांकन कराया गया।
इस अवसर पर युवा जदयू के हेमंत पाठक ने कहा कि आरटीई के तहत नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और गरीब बच्चों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि मामले से संबंधित जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत भी मांगी गई है तथा कई ऐसे साक्ष्य उपलब्ध हैं, जो लॉटरी प्रक्रिया में अनियमितता की ओर संकेत करते हैं।
हेमंत पाठक ने मांग की कि इस वर्ष की लॉटरी प्रक्रिया को निरस्त कर नई लॉटरी कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि पांच दिनों के भीतर उपायुक्त कार्यालय से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो शिक्षा विभाग के कार्यालय के बाहर आंदोलन किया जाएगा। साथ ही पूरे मामले को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने के लिए अधिवक्ताओं से भी राय ली जा रही है। ज्ञापन की एक प्रति विधायक सरयू राय को भी सौंपे जाने की जानकारी दी गई।
ज्ञापन सौंपने वालों में हेमंत पाठक, राहुल गुप्ता, मंटु सतुआ, जय प्रकाश साव, शुभम मिश्रा, हैप्पी कुमार, रितेश पांडेय सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

