अल्पसंख्यक निदेशालय, उर्दू अकादमी, मदरसा बोर्ड और अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के गठन पर सरकार से कार्रवाई की अपील
रांची : धुर्वा स्थित झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के कार्यालय में अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान की अध्यक्षता में आयोग की आंतरिक बैठक हुई। बैठक में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े शिक्षा, सामाजिक, आर्थिक, कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए और राज्य सरकार से इन पर शीघ्र कार्रवाई की अपील करने का निर्णय लिया गया।

इमरोज मॉब लिंचिंग मामले पर आयोग सख्त…..
बैठक में चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र के बड़गांव में मोहम्मद इमरोज की मॉब लिंचिंग में हुई मौत का मामला प्रमुखता से उठा। आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए सदस्यों को मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इमरोज की बेरहमी से हत्या बेहद दुखद और शर्मनाक है। घटनास्थल पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद घटना को नहीं रोका जा सका, यह गंभीर चिंता का विषय है।
आयोग की पहल के बाद चतरा एसपी द्वारा घटनास्थल पर मौजूद दो सब-इंस्पेक्टर समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई निलंबन की कार्रवाई की आयोग ने सराहना की। हालांकि, बैठक में थाना प्रभारी के खिलाफ अब तक समान कार्रवाई नहीं होने पर चिंता जताई गई। आयोग ने मामले में पुलिस की भूमिका की भी गंभीरता से समीक्षा की. आयोग ने निर्णय लिया कि अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान और उपाध्यक्ष प्रणेश सोलोमन की ओर से मामले की संयुक्त एवं विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। आयोग के सचिव को डीजीपी और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर एक सप्ताह के भीतर मामले में अब तक हुई जांच और कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
सोशल मीडिया पर कथित भड़काऊ गतिविधियों पर भी चिंता…..
बैठक में सोशल मीडिया के माध्यम से संवेदनशील मामलों को कथित तौर पर सांप्रदायिक रंग देने और आपत्तिजनक भाषा के जरिए माहौल खराब करने की कोशिशों पर भी चर्चा हुई। आयोग ने ऐसी गतिविधियों को निंदनीय बताते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करने का निर्णय लिया। सचिव को इस संबंध में डीजीपी और मुख्य सचिव को पत्र भेजने का निर्देश दिया गया. आयोग ने पिछले तीन वर्षों में राज्य में हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ कथित मारपीट अथवा मौत के मामलों की भी समीक्षा की। लंबित मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक में हजारीबाग में रूपेश पाठक की मॉब लिंचिंग के मामले का भी उल्लेख करते हुए पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा और सरकारी सहायता में समानता की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
अरबी-फारसी विश्वविद्यालय समेत चार संस्थानों के गठन का प्रस्ताव…..
शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड में अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, अल्पसंख्यक निदेशालय, मदरसा बोर्ड और उर्दू अकादमी के गठन को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया। आयोग ने बिहार के मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय की तर्ज पर झारखंड में भी अरबी और फारसी भाषा एवं शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय स्थापित करने की जरूरत बताई. इसके साथ ही आलिम और फाजिल की डिग्री की मान्यता तथा उससे जुड़े कानूनी एवं शैक्षणिक मुद्दों पर भी चर्चा की गई। आयोग ने राज्य सरकार से इन सभी संस्थानों के गठन की दिशा में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई की अपील करने का फैसला लिया।
अल्पसंख्यक स्कूलों में रिक्त पद भरने पर जोर…..
बैठक में अल्पसंख्यक स्कूलों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने, विद्यार्थियों को किताबें, ड्रेस, साइकिल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। आयोग ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित न रहकर वास्तविक रूप से जरूरतमंद विद्यार्थियों तक पहुंचना चाहिए।
अल्पसंख्यक विकास वित्त आयोग के गठन की मांग…..
बैठक में अल्पसंख्यक विकास वित्त आयोग के गठन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। आयोग ने कहा कि झारखंड में इस संस्था के गठन नहीं होने से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को आर्थिक एवं कारोबारी गतिविधियों के लिए ऋण और अन्य वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. आयोग ने विकास वित्त आयोग के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू करने पर जोर दिया। वहीं, TCDC के माध्यम से अल्पसंख्यकों को मिलने वाले ऋण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रभावी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता जताई गई।
शिक्षा और आर्थिक विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर……
बैठक में सदस्यों ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए बनाई जा रही योजनाएं केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है, ताकि शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक विकास का वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।
लंबित मामलों के समाधान के लिए संबंधित सरकारी विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और आवश्यक कदम उठाने पर भी सहमति बनी. बैठक के अंत में आयोग के सदस्यों ने संकल्प लिया कि अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के साथ संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा और इनके समाधान के लिए लगातार प्रभावी प्रयास किए जाएंगे. बैठक में उपाध्यक्ष प्रणेश सोलोमन, शमशेर आलम और ज्योति सिंह मथारू, सदस्य वारिस कुरैशी, डॉ. एम. तौसीफ, रंजीत कुमार मल्लिक, सविता टुडू और इकरारुल हसन तथा आयोग के सचिव मुमताज अली मौजूद रहे।
