एसएसपी से शिकायत के बाद बढ़ा विवाद, शिकायतकर्ता का आरोप—बंदूक की नोक पर संपत्ति हड़पने का दबाव, अशोक सिंह का पलटवार—विक्रम शर्मा की मौत के बाद लगाया जा रहा बेबुनियाद आरोप
लोकतंत्र सवेरा/जमशेदपुर : देहरादून के सेंटर सिटी मॉल के समीप 13 फरवरी 2026 को कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या के कुछ महीने बाद जमशेदपुर में संपत्ति और कथित रंगदारी को लेकर नया विवाद सामने आया है। विक्रम शर्मा के करीबी बताए जाने वाले सोनारी खुंटाडीह निवासी अशोक सिंह राघव पर सीएच एरिया स्थित एक संपत्ति को कथित रूप से हड़पने और घर खाली करने के एवज में पांच करोड़ रुपये की मांग करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। मामले में बिष्टुपुर रामदास भट्ठा निवासी भूपेंद्र सिंह ने वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से लिखित शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में वर्ष 2024 से संपत्ति को लेकर कथित दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है। वहीं, अशोक सिंह राघव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विक्रम शर्मा की मौत के बाद लगाया गया झूठा और निराधार आरोप बताया है। फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप के बीच है और पुलिस जांच के बाद ही पूरे विवाद की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायत में बंदूक की नोक पर संपत्ति हड़पने का आरोप……
भूपेंद्र सिंह ने एसएसपी को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि सीएच एरिया स्थित उनकी संपत्ति पर अशोक सिंह की नजर थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, संपत्ति अपने नाम कराने के लिए उस पर कथित तौर पर दबाव बनाया गया।
शिकायत में कहा गया है कि 3 फरवरी 2024 को अशोक सिंह उनके घर पहुंचे थे। इस दौरान वीडियो कॉल के माध्यम से उनकी कथित तौर पर विक्रम शर्मा से बातचीत कराई गई। इसके बाद 8 जुलाई 2024 को भी विक्रम शर्मा से वीडियो कॉल के जरिए कथित धमकी दिलाए जाने का आरोप लगाया गया है. भूपेंद्र सिंह का यह भी आरोप है कि 9 जुलाई 2024 को उनके परिवार के वाहन का पीछा किया गया। इसके बाद संपत्ति का पावर ऑफ अटॉर्नी अपने नाम कराने का दबाव बनाए जाने की बात शिकायत में कही गई है।
विक्रम शर्मा की मौत के बाद पांच करोड़ की मांग का दावा…….
शिकायतकर्ता का आरोप है कि विक्रम शर्मा की मौत के बाद अब अशोक सिंह राघव द्वारा घर खाली करने के बदले पांच करोड़ रुपये की कथित मांग की जा रही है। भूपेंद्र सिंह ने पूरे मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता पुलिस जांच, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
विक्रम शर्मा की मौत के बाद कारोबार की जिम्मेदारी अशोक सिंह के पास होने का दावा……..
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विक्रम शर्मा की हत्या के बाद उससे जुड़े नेटवर्क और कारोबार में भी बदलाव की चर्चा सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि दुमका जेल में बंद गैंगस्टर अखिलेश सिंह की सहमति से विक्रम उद्योग प्रा. लि. सहित उससे जुड़े कारोबार की जिम्मेदारी अशोक सिंह राघव को सौंपी गई है. बताया जा रहा है कि देहरादून से लेकर जमशेदपुर तक फैले स्टोन क्रशर, रियल एस्टेट और अन्य कारोबार की देखरेख भी उनके जिम्मे है। इसके अलावा अखिलेश सिंह से जुड़ी करीब 670 करोड़ रुपये की संपत्ति की निगरानी की जिम्मेदारी भी उन्हें दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
670 करोड़ की संपत्ति का मामला पहले भी रहा चर्चा में……
अखिलेश सिंह से जुड़ी संपत्तियों को लेकर पूर्व में पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई भी चर्चा में रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 29 मार्च 2017 को जिला पुलिस ने बिष्टुपुर स्थित सुजीत जैन अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 503 में छापेमारी की थी। वहां से अचल संपत्तियों की खरीद-बिक्री से जुड़े कई मूल दस्तावेज बरामद किए जाने की बात सामने आई थी. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पुलिस की ओर से ईडी को पत्र भेजे जाने और संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बाद में ईडी की विशेष अदालत में चले मामले में साक्ष्यों के आधार पर राहत मिलने के बाद जब्त संपत्तियों को मुक्त करने का आदेश दिया गया। इसके बाद करीब 670 करोड़ रुपये की संपत्ति रिलीज किए जाने की बात सामने आई थी।
अशोक सिंह ने आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार…..
अपने ऊपर लगे आरोपों पर अशोक सिंह राघव ने कहा कि भूपेंद्र सिंह और विक्रम शर्मा के बीच पहले से अच्छे संबंध थे और दोनों के बीच कारोबारी संबंध भी रहे हैं। उनका दावा है कि वर्ष 2024 में भूपेंद्र सिंह ने अपनी इच्छा से पावर ऑफ अटॉर्नी दिया था. अशोक सिंह के अनुसार, करीब दो वर्ष बाद अचानक इस तरह के गंभीर आरोप लगाया जाना सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि विक्रम शर्मा की मौत के बाद उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और संपत्ति हड़पने के आरोपों को पूरी तरह झूठा और निराधार बताया।
अब पुलिस जांच से खुलेगा विवाद का सच……
मामले में एक ओर शिकायतकर्ता ने बंदूक की नोक पर संपत्ति हड़पने, दबाव बनाने और पांच करोड़ रुपये की कथित रंगदारी मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, तो दूसरी ओर अशोक सिंह राघव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि पावर ऑफ अटॉर्नी किन परिस्थितियों में बनाया गया था, संपत्ति को लेकर दोनों पक्षों के बीच वास्तविक विवाद क्या है, पांच करोड़ रुपये की मांग के आरोप में कितनी सच्चाई है और विक्रम शर्मा की मौत के बाद इस विवाद ने नया रूप क्यों लिया. फिलहाल मामला शिकायत, आरोप और पलटवार के बीच है। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी और वास्तविक स्थिति पुलिस के सामने उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों एवं संबंधित पक्षों के बयानों से स्पष्ट होगी।



























































