जो दर्द को आवाज देते हैं, वही बदलाव की नींव रखते हैं, जो भूखे रहकर लड़ते हैं, वही शहर की राहें सुरक्षित करते हैं।
जमशेदपुर : गोलमुरी की सड़क सुरक्षा को लेकर उठी आवाज आखिरकार सोमवार को जमीन पर दिखाई देने लगी। लंबे समय से अव्यवस्थित पार्किंग, तेज रफ्तार वाहनों और लगातार हो रही दुर्घटनाओं से जूझ रहे गोलमुरी चौक पर डिवाइडर और स्पीड ब्रेकर का निर्माण कार्य शुरू हो गया। इसे लेकर पिछले कई दिनों से चल रहे आंदोलन को सोमवार को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब टाटा स्टील के अधिकारियों और ट्रैफिक डीएसपी ने भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचकर बजरंग सेवा संस्थान के संस्थापक सागर तिवारी से वार्ता की।

वार्ता के दौरान गोलमुरी की सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था से जुड़ी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक सहमति बनी। इसके बाद जुस्को की ओर से गोलमुरी चौक पर डिवाइडर का काम शुरू कराया गया। साथ ही स्पीड ब्रेकर का निर्माण भी कराया गया। अधिकारियों ने जल्द ही गोलचक्कर निर्माण की दिशा में भी काम शुरू करने का आश्वासन दिया. काम शुरू होते ही आंदोलन स्थल पर खुशी की लहर दौड़ गई। बजरंग सेवा संस्थान के सदस्यों ने नारियल फोड़कर विकास कार्य का शुभारंभ किया। चार दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे धर्मबीर महतो का अनशन उनकी बहनों ने जूस पिलाकर समाप्त कराया। रक्षाबंधन के दिन सड़क सुरक्षा के लिए लिया गया संकल्प सोमवार को पूरा हुआ तो आंदोलनकारियों के चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दिया।
20 अगस्त को अप्पू तिवारी ने उठाई थी आवाज……
गोलमुरी में सड़क सुरक्षा, अव्यवस्थित पार्किंग और लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर 20 अगस्त 2026 को आजसू प्रवक्ता अप्पू तिवारी ने भूख हड़ताल शुरू की थी। मौके पर पहुंचे गोलमुरी यातायात थाना प्रभारी ने एक सप्ताह के भीतर समस्या के समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया था। जनहित में दिए गए समय और आग्रह को स्वीकार करते हुए अप्पू तिवारी ने करीब ढाई घंटे बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया था. लेकिन निर्धारित समय में अपेक्षित काम शुरू नहीं होने के बाद आंदोलन ने नया मोड़ लिया। बजरंग सेवा संस्थान ने धर्मबीर महतो की अगुवाई में 28 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू कर दी। चार दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद आखिरकार प्रशासन और कंपनी प्रबंधन को सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर ठोस कदम उठाना पड़ा।
“आम युवा ने उठाई आवाज, व्यवस्था को बदलने पर मजबूर किया”…….
बजरंग सेवा संस्थान का कहना है कि इस आंदोलन की सबसे खास बात यह रही कि किसी बड़े राजनीतिक नेतृत्व के बजाय एक आम युवा ने अपनी टीम के साथ सड़क सुरक्षा का मुद्दा उठाया और लगातार चार दिनों तक भूख हड़ताल कर कंपनी से काम शुरू करवाने में सफलता हासिल की. संगठन ने कहा कि लंबे समय बाद ऐसा उदाहरण सामने आया है, जब आम युवाओं के लगातार संघर्ष और जनहित के मुद्दे पर किए गए आंदोलन के बाद सड़क सुरक्षा से जुड़ा काम धरातल पर शुरू हुआ।
18 दिनों में 10 दुर्घटनाएं, दो मौतें बनीं आंदोलन की वजह…..
गोलमुरी क्षेत्र में लंबे समय से पार्किंग की अव्यवस्था, यातायात नियंत्रण की कमी, तेज रफ्तार वाहनों और सड़क सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई थी। आंदोलन के दौरान पिछले 18 दिनों में हुई 10 दुर्घटनाओं और दो मौतों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। आंदोलनकारियों ने इसे महज सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी बचाने का सवाल बताया. बजरंग सेवा संस्थान ने आंदोलन के दौरान सहयोग और सकारात्मक पहल के लिए टाटा स्टील, जुस्को, ट्रैफिक विभाग, विधायक पूर्णिमा साहू समेत सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया।
आंदोलन की जीत या जनसुरक्षा की पहली सीढ़ी? …..
डिवाइडर और स्पीड ब्रेकर का काम शुरू होने से फिलहाल गोलमुरी की सड़क पर राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि आंदोलनकारियों का कहना है कि स्थायी समाधान अभी बाकी है। गोलचक्कर निर्माण, पार्किंग व्यवस्था और यातायात को व्यवस्थित करने जैसे मुद्दों पर भी जल्द कार्रवाई जरूरी है. गोलमुरी की सड़कों पर शुरू हुआ यह काम सिर्फ सीमेंट और लोहे का निर्माण नहीं, बल्कि उन आवाजों की जीत है जो हादसों के बाद चुप बैठने के बजाय बदलाव की मांग लेकर सड़क पर उतरीं।
“भूख की तपिश से जब हौसला तपता है, तभी बदलाव का रास्ता निकलता है;
चार दिन का संघर्ष यूं ही नहीं गया,
गोलमुरी में अब सुरक्षा का काम दिखेगा।”
