जमशेदपुर : जेम्को क्षेत्र में दुकानों के तोड़े जाने और दुकानदारों के साथ मारपीट की घटना के बाद पीड़ित परिवारों की मदद के लिए मजदूर नेता सह टाटा मोटर्स के बर्खास्त कर्मी बंटी सिंह एक बार फिर आगे आए। उन्होंने पीड़ित दुकानदारों को अपनी ओर से 20-20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके साथ खड़े होने का संदेश दिया।

बंटी सिंह ने कहा कि 14 अगस्त को हुई घटना के बाद से पीड़ित परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं, लेकिन अब तक किसी सांसद, विधायक अथवा स्वयं को जनसेवक कहने वाले नेता ने उनकी सुध लेने की जरूरत नहीं समझी। ऐसे समय में जब पीड़ित परिवारों को सहारे और संवेदना की जरूरत थी, तब उनकी मदद के लिए आगे आना ही वास्तविक जनसेवा है।
बताया गया कि टाटा कंपनी के सुरक्षा कर्मियों द्वारा जेमको क्षेत्र के दुकानदारों की दुकानों को तोड़े जाने और दुकानदारों के साथ कथित मारपीट की घटना सामने आई थी। घटना के बाद मामला मीडिया में प्रमुखता से उठाया गया। 15 अगस्त को ही बंटी सिंह पीड़ित दुकानदारों के बीच पहुंचे थे और उनके आंसू पोंछते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया था। अब उन्होंने आर्थिक सहायता देकर अपने उस वादे को भी पूरा किया।
सिर्फ चुनाव के समय नहीं, संकट में भी जनता के साथ खड़ा होना चाहिए
बंटी सिंह ने जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति का उद्देश्य पद, प्रतिष्ठा और स्वार्थ नहीं बल्कि जनता की सेवा और उसके अधिकारों की रक्षा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि जनता ऐसे लोगों को पहचाने जो चुनाव के समय घर-घर पहुंचते हैं, लेकिन संकट के समय जनता को अकेला छोड़ देते हैं।
उन्होंने कहा, “सेवा करने का संकल्प लेकर राजनीति में आने वाले कुछ लोग धीरे-धीरे जनता का ही शोषण करने लगते हैं। ऐसे लोगों से जनता को सावधान रहने की जरूरत है। जनप्रतिनिधि वही है जो जनता के सुख-दुख में उसके साथ खड़ा हो, न कि सिर्फ चुनाव के समय दिखाई दे।”
बंटी सिंह ने कहा कि गरीब दुकानदारों की रोजी-रोटी उजाड़े जाने के मामले में सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। पीड़ितों को न्याय, सम्मान और उनके नुकसान की भरपाई दिलाने के लिए संघर्ष की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता, वे उनके साथ खड़े रहेंगे।
जेमको की घटना को लेकर बंटी सिंह की सक्रियता ने एक बार फिर स्थानीय राजनीति में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और जनसरोकार के सवाल को चर्चा में ला दिया है। आर्थिक सहायता के साथ उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीति का असली मूल्यांकन कुर्सी से नहीं, संकट की घड़ी में जनता के साथ खड़े होने से होता है।