रांची/जमशेदपुर : झारखंड पुलिस में थाना प्रभारी एवं ओपी प्रभारियों की पोस्टिंग में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर आज़ाद समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सह राष्ट्रीय कोर कमिटी सदस्य काशिफ़ रज़ा ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने विभिन्न जिलों से उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कई जिलों में मुस्लिम समुदाय से आने वाले थाना प्रभारियों की संख्या शून्य है, जबकि कुछ जिलों में यह संख्या बेहद कम है।

काशिफ़ रज़ा ने दावा किया कि झारखंड में करीब 546 थानों के मुकाबले केवल 18 थाना प्रभारी मुस्लिम समुदाय से हैं। उनका कहना है कि राज्य की आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी को देखते हुए पुलिस प्रशासन में प्रतिनिधित्व के आंकड़े पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। वहीं, झारखंड की धार्मिक आबादी के आधिकारिक आंकड़ों का आधार 2011 की जनगणना है।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दल मुस्लिम समाज के समर्थन और मतदाताओं की भूमिका की चर्चा करते हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर प्रतिनिधित्व के सवाल पर समुदाय को अपेक्षित अवसर नहीं मिलने की शिकायत सामने आती रही है।
काशिफ़ रज़ा ने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक मुस्लिम थाना प्रभारी को अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि पुलिस प्रशासन में सभी समुदायों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि थाना प्रभारी और ओपी प्रभारी की पोस्टिंग में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए तथा अधिकारियों को उनकी योग्यता, अनुभव और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर समान अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने सरकार और पुलिस विभाग से इस पूरे मामले पर ध्यान देने तथा थाना एवं ओपी प्रभारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है. हालांकि, थाना प्रभारी की नियुक्ति में किसी अधिकारी की धार्मिक पहचान के बजाय योग्यता, सेवा रिकॉर्ड, अनुभव और प्रशासनिक जरूरतों को आधार बनाने की प्रक्रिया पर भी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होना महत्वपूर्ण होगा।
