रांचीः जिला के बुंडू में शुक्रवार को संपूर्ण आदिवासी समाज, पांच परगना क्षेत्र इकाई के तत्वावधान में विशाल आदिवासी जनआक्रोश महारैली का आयोजन किया गया. रैली की शुरुआत एदेलहातु मुंडा मैदान से हुई, जो बुंडू टोल गेट से निकलकर नगर क्षेत्र की परिक्रमा करते हुए रांची-टाटा राष्ट्रीय मार्ग- 33 होते हुए अनुमंडल कार्यालय परिसर के सामने पहुंची, जहां इसका समापन हुआ. इस रैली में हजारों की संख्या में आदिवासी महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए. पारंपरिक पोशाक और सरना झंडा के साथ लोग नारे लगाते हुए अपने हक और अस्तित्व की रक्षा की मांग कर रहे थे. रैली में शामिल नेताओं का कहना था कि आदिवासी समाज की अस्मिता, भाषा और संस्कृति पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

कुड़मी को ST सूची में शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध
इस रैली की अगुवाई प्रमुख आदिवासी नेताओं में प्रेम शाही मुंडा, लक्ष्मी कांत मुंडा, ज्योत्सना केरकेटा और कुमुदिनी प्रभावती ने किया. नेताओं ने मंच से कहा कि कुड़मी महतो समाज को जनजाति सूची में शामिल करने की मांग पूरी तरह गलत है. इससे आदिवासी समुदाय के अधिकारों पर खतरा पैदा होगा. प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान और हक की रक्षा के लिए अब पहले से ज्यादा एकजुट है. वहीं ज्योत्सना केरकेट्टा ने अपने संबोधन में कहा कि महतो समाज आदिवासियों के हक़ को छीनना चाहता है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
ज्योत्सना केरकेट्टा ने कहा कि 30 अक्टूबर को अड़की से बुंडू आदिवासी जनाक्रोश रैली में शामिल होने आ रहे यात्री वाहन के पलटने से कर लोगों की मौत हो गई थी. उन्होंने कहा कि वह अपने सोने का चैन बेचकर उन गरीब परिवारों का आर्थिक मदद करेंगे. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पीड़ित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी है कि अगर कुड़मी समाज के लोग ST का दर्जा की मांग को लेकर रेल रोकेंगे तो पूरा आदिवासी समाज अखड़ा में जुट कर विरोध करेगा.
डीएसपी ओम प्रकाश के नेतृत्व में सुरक्षा के पुख़्ता इंतजाम
रैली को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. बुंडू डीएसपी ओम प्रकाश के नेतृत्व में अनुमंडल क्षेत्र के सभी थाना प्रभारी और ज़िला बल के जवान तैनात रहे. पूरे कार्यक्रम के दौरान विधि-व्यवस्था नियंत्रण में रही और रैली शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई.
