जमशेदपुर (घाटशिला) : झारखंड मुस्लिम मोर्चा ने राज्य सरकार से मांग की है कि झारखंड के सभी अल्पसंख्यक मुसलमानों को पिछड़ा वर्ग (1) में शामिल किया जाए। मोर्चा का कहना है कि यह फैसला मुसलमानों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।

झारखंड मुस्लिम मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि झारखंड बनने के बाद से अब तक मुसलमानों को जाति प्रमाण पत्र और आरक्षण का लाभ सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है। कई वर्गों के मुस्लिमों को आज भी सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा।
मोर्चा के अध्यक्ष ने बताया कि झारखंड सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए ताकि मुसलमानों को भी अन्य पिछड़े वर्गों की तरह समान अधिकार और अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भी कई बार अल्पसंख्यक समुदायों के उत्थान के लिए योजनाएं चलाई हैं, लेकिन राज्य स्तर पर इन योजनाओं का लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंच पा रहा है।
मोर्चा ने कहा कि वर्ष 2006 में गठित सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि देशभर में मुसलमान सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हैं। इसके बावजूद अब तक राज्य सरकारों द्वारा उन्हें उचित श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।
झारखंड मुस्लिम मोर्चा ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से तत्काल पहल करने की मांग करते हुए कहा कि मुसलमानों को पिछड़ा वर्ग (1) में शामिल करने से उन्हें सरकारी योजनाओं, नौकरियों और शैक्षणिक अवसरों का लाभ मिलेगा, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
मोर्चा ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मुसलमानों के उत्थान के लिए जो योजनाएं बना रही हैं, उनका लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाना भी जरूरी है।
मोर्चा के प्रतिनिधियों का कहना है —
“हमारा उद्देश्य किसी समुदाय को अलग दिखाना नहीं, बल्कि समान अवसर और न्याय की मांग करना है। जब तक मुसलमानों को सामाजिक समानता नहीं मिलेगी, तब तक उनका सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।”
अंत में संगठन ने राज्य सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो झारखंड भर में आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
