लोकतंत्र सवेरा : इस बार के 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर रही। महिलाओं और पहली-बार वोट देने वाले मतदाताओं ने चुनावी परिदृश्य को बदलने में अहम भूमिका निभाई।

शुरुआती रुझानों में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) मजबूत दिख रही है और सत्ता में वापसी-का इरादा स्पष्ट है।
महिला मतदाताओं के बीच एनडीए को अपेक्षाकृत अधिक समर्थन मिला है, जो चुनाव के निर्वात-प्रेरक बन सकता है।
चुनावी परिदृश्य और महिला मतदाता
मतदान प्रतिशत और महिलाओं की भागीदारी
इस चुनाव में दोनों चरणों का औसत मतदान लगभग 66% रहा — यह पिछले दौर की तुलना में काफी बढ़ा है।
विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है — ग्रामीण व शहरी इलाकों में महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई है और सामाजिक-सशक्तिकरण की दिशा में संकेत दिए हैं।
एक सर्वे में ‘हाउसवाइफ’ श्रेणी की महिलाओं में से 48% ने एनडीए को वोट दिया, जबकि महागठबंधन को इस समूह में 37% समर्थन मिला।
महिलाओं की उम्मीदें और मुद्दे
महिलाओं ने इस बार सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी है—वे सिर्फ वोट देने नहीं आई बल्कि अपनी आवाज और मुद्दों को विधानसभा की सीटों तक पहुंचाना चाहती हैं।
मतदाताओं में यह संदेश साफ है : अब महिलाएं सिर्फ दर्शक नहीं रहना चाहतीं, वे परिवर्तन की सक्रिय भागीदार बनना चाहती हैं।
एनडीए की रणनीति और महिला-प्रधान घोषणाएँ
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने चुनाव से पहले अपनी घोषणाओं में महिलाओं, युवाओं और किसानों पर विशेष जोर दिया।
नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के सशक्तिकरण को अभियान की रीढ़ माना — उन्होंने घोषणाएँ कीं जैसे कि पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण और राज्य-स्तर पर 35% नौकरियों में महिलाओं का आरक्षण।
इस रणनीति के तहत यह संदेश दिया गया कि “नारी शक्ति के साथ मजबूती से खड़ी है” सरकार।
शुरुआती रुझान और एनडीए की स्थिति
गिनती शुरू होते ही एनडीए ने 100 से अधिक सीटों में बढ़त बनाई थी — जिससे यह संकेत मिला कि उन्हें स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना है।
एनडीए के अंदर प्रमुख दल जैसे जनता दल (उपयोग) (जेडीयू) ने “फिर से आ रही है सुशासन-की सरकार” का नारा दिया है, जो उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है।
क्या इस ‘नारी शक्ति’ ने वास्तविक प्रभाव छोड़ा?
महिलाओं ने बड़े पैमाने पर मतदान किया — और उनका वोट बैंक अब निर्णायक कहा जा रहा है।
हालाँकि, विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि महिलाओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या उनकी मांगों को नीतिगत निर्णयों में उतारा जाएगा।
आगे क्या होगा?
गिनती पूरी होने पर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी कि एनडीए कितनी सीटें ले पाई और सरकार कितनी मजबूती से बनी है।
महिलाओं के लिए सुरक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसे विषयों पर सरकार की कार्रवाई पर निगाह होगी — सिर्फ वोट-बैंक नहीं बल्कि वास्तविक असर मापा जाएगा।
राज्य-स्तर पर विकास व सुशासन का एजेंडा फिर से जांच के घेरे में रहेगा — क्या यह सिर्फ चुनावी नारा था या अब इसे लागू करना होगा।
