जमशेदपुर/बोड़ाम : बोड़ाम थाना क्षेत्र की बेलडीह पंचायत अंतर्गत जोबा गांव के फुटबॉल मैदान में सोमवार को आयोजित अवैध भैंसा लड़ाई ने खूनी मोड़ ले लिया। उग्र भैंसों के हमले में जोबा निवासी सुभाष कर्मकार (55) की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि उनका 15 वर्षीय बेटा सागर कर्मकार गंभीर रूप से घायल है और एमजीएम अस्पताल में भर्ती है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मैदान में दो भैंसों के बीच लड़ाई चल रही थी। इसी दौरान एक भैंसा बेकाबू होकर भीड़ की ओर दौड़ा और सुभाष कर्मकार को सींग पर उठाकर पटक दिया। पिता को बचाने दौड़े बेटे सागर पर भी भैंसे ने हमला कर दिया। घटना दोपहर करीब एक बजे की बताई जा रही है। ग्रामीण दोनों को तुरंत एमजीएम अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान सुभाष कर्मकार ने दम तोड़ दिया।
सूचना मिलते ही बोड़ाम पुलिस दोपहर करीब ढाई बजे मौके पर पहुंची, भीड़ को खदेड़ा और भैंसा लड़ाई बंद कराई।
कानून की खुली अवहेलना…..
झारखंड समेत पूरे देश में भैंसा लड़ाई पर प्रतिबंध है। यह पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत अवैध है। इसके बावजूद बोड़ाम, पटमदा, कमलपुर और सीमावर्ती इलाकों—यहां तक कि पश्चिम बंगाल से सटे गांवों—में ऐसे आयोजन गुप्त रूप से कराए जा रहे हैं। आरोप है कि आयोजक सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनलों के जरिए सूचना फैलाते हैं और सीमावर्ती थाना क्षेत्रों का फायदा उठाते हैं।
जांच और कार्रवाई के संकेत…..
पूर्वी सिंहभूम के डीसी कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि भैंसा लड़ाई पूरी तरह गलत है, मामले की पूरी जांच होगी और आयोजकों पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बोड़ाम थाना प्रभारी मनोरंजन कुमार ने बताया कि आयोजन गुप्त तरीके से किया गया था। आयोजन समिति और युवा कमेटी के सदस्यों की पहचान की जा रही है। फिलहाल कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है।
सवाल बरकरार…….
जब कानून साफ है, तो ऐसे आयोजन कैसे होते रहे?
सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन की पकड़ कब मजबूत होगी?
एक परिवार उजड़ गया—अब जिम्मेदार कौन?
👉 यह हादसा चेतावनी है…..
अवैध और क्रूर आयोजनों पर सख्त रोक नहीं लगी, तो ऐसे मासूम जानें यूं ही जाती रहेंगी।
