बहरागोड़ा : खुशियों से भरी शादी, फिर मां बनने की उम्मीद… लेकिन यह सफर महज़ 16 घंटे में दर्दनाक मौत पर खत्म हो गया. बहरागोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक नाबालिग विवाहिता की प्रसव के बाद इलाज के दौरान मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और एएनएम पर घोर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है।



शनिवार को जन्म, रविवार सुबह मौत….
मृतका की उम्र महज़ 17 वर्ष बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार— शनिवार दोपहर 1:50 बजे विवाहिता ने एक बच्ची को जन्म दिया प्रसव के समय मां और बच्चा दोनों स्वस्थ बताए गए लेकिन शनिवार रात अचानक तबीयत बिगड़ने लगी।
परिजनों का आरोप है कि…….
“कई बार एएनएम को बुलाया गया, लेकिन हमें टाल दिया गया। हालत बिगड़ती रही और डॉक्टर को समय पर नहीं बुलाया गया।” रविवार सुबह 6:25 बजे तक आते-आते विवाहिता की मौत हो चुकी थी।
परिजनों का आरोप : वक्त रहते इलाज मिलता तो जान बचती…….
परिजनों का कहना है कि स्थिति गंभीर होने पर डॉ. सुराई मांडी को सूचना दी गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अस्पताल प्रबंधन ने मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया है, लेकिन परिजन इसे मानने को तैयार नहीं हैं।
“इलाज में लापरवाही और समय पर डॉक्टर न मिलने से हमारी बेटी की जान चली गई”
— परिजन
अस्पताल में हंगामा, शव लेने से किया इनकार……
घटना के बाद अस्पताल परिसर में जबरदस्त हंगामा हुआ। परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया. एएनएम और अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की करीब 11 घंटे तक अफरातफरी की स्थिति बनी रही। काफी मशक्कत और समझाइश के बाद रविवार शाम करीब 5 बजे परिजन शव लेकर गए।
विधायक मौके पर पहुंचे, सख्त कार्रवाई की मांग……
घटना की जानकारी मिलते ही विधायक समीर मोहंती पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। परिजनों ने विधायक से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
विधायक ने सिविल सर्जन को निर्देश देते हुए कहा—
“मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और
लापरवाह एएनएम को तत्काल सस्पेंड किया जाए।”
सवालों के कटघरे में स्वास्थ्य व्यवस्था…..
नाबालिग विवाहिता को समय पर विशेषज्ञ इलाज क्यों नहीं मिला?
रात में हालत बिगड़ने के बावजूद डॉक्टर क्यों नहीं पहुंचे?
क्या ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ कागजों में दुरुस्त है?
यह मामला सिर्फ एक मौत नहीं, स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनहीनता और लापरवाही की जीती-जागती मिसाल बन गया है।
एक नवजात मां की मौत ने सिस्टम को बेनकाब कर दिया अब देखना यह है कि
जांच के नाम पर फाइलें चलेंगी या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होगी?
