जमशेदपुर : देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खासकर शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे जरूरी क्षेत्रों में बढ़ती लागत ने मध्यम और गरीब वर्ग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।



एक ओर सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी, डॉक्टरों की अनुपलब्धता और लंबी कतारों के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, तो दूसरी ओर मजबूरी में लोगों को महंगे प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज का खर्च आम आदमी की जेब पर भारी पड़ता है।
इसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में भी हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। कई प्राइवेट स्कूलों ने इस साल करीब 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। हालांकि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता और संसाधनों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, जिसके कारण अधिकांश अभिभावक मजबूरी में अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की व्यवस्था को मजबूत करे, तो आम लोगों को राहत मिल सकती है। बेहतर सुविधाएं, पर्याप्त शिक्षक और डॉक्टर, साथ ही पारदर्शी व्यवस्था से शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में सुधार संभव है।
फिलहाल सवाल यही है कि महंगाई के इस दौर में आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां? क्या सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सख्त नीतियां बनानी चाहिए?
