जमशेदपुर : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा विधानसभा में देवी-देवताओं पर किया गया कटाक्ष निंदनीय ही नहीं, बल्कि करोड़ों आस्थावानों की भावनाओं पर सीधा प्रहार है। यह बयान एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति की गरिमा के विपरीत है और समाज में अनावश्यक वैमनस्य फैलाने वाला है।

ब्राह्मण युवा शक्ति संघ के संस्थापक अध्यक्ष अप्पू तिवारी ने कहा कि ब्राह्मण समाज इस बयान की कड़ी भर्त्सना करता है और स्पष्ट करना चाहता है कि भारत की पहचान उसकी समृद्ध आस्था, संस्कृति और प्रतिभा से है। इन मूल्यों पर आघात किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा।
संघ का मानना है कि देश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा हमारी परंपराएं नहीं, बल्कि गलत नीतियाँ और विकृत मानसिकता है। यदि शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण जैसी नीतियों को संतुलित और न्यायपूर्ण तरीके से लागू किया जाता, तो भारत प्रतिभा के क्षेत्र में विश्व में सर्वोच्च स्थान पर होता।
मां लक्ष्मी की पूजा करने वाले इस देश में यदि भ्रष्टाचार पर लगाम लगती, तो भारत आर्थिक रूप से दुनिया में अग्रणी होता। भगवान विश्वकर्मा की आराधना करने वाले राष्ट्र में यदि कमीशनखोरी समाप्त होती, तो भारत औद्योगिक और तकनीकी शक्ति में भी किसी से पीछे नहीं रहता। आज वास्तविक समस्या आस्था नहीं, बल्कि वह व्यवस्था है जहाँ योग्य और कर्मठ लोगों की उपेक्षा कर चापलूस और अयोग्य व्यक्तियों को आगे बढ़ाया जाता है। ऐसे में निर्णयों का स्तर गिरना स्वाभाविक है।
संघ यह भी स्पष्ट रूप से कहना चाहता है कि झारखंड की राजनीति में कई योग्य और अनुभवी नेता मौजूद थे, लेकिन वंशवाद की राजनीति के कारण सत्ता कुछ विशेष हाथों में सिमट गई। ऐसे में मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा समझते हुए शब्दों और आचरण में संयम बरतना चाहिए। ब्राह्मण युवा शक्ति संघ चेतावनी देता है कि यदि भविष्य में आस्था और सनातन परंपराओं पर इस प्रकार के आपत्तिजनक बयान दिए गए, तो संगठन सड़क से सदन तक जोरदार विरोध करेगा। आस्था पर प्रहार नहीं, व्यवस्था में सुधार ही देशहित का मार्ग है।
