जमशेदपुर : शहर में अवैध गतिविधियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बिरसानगर थाना क्षेत्र एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां सूत्रों के अनुसार एक बंगले में पिछले कई महीनों से देह व्यापार का धंधा बेखौफ और संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि अड्डा बदल गया, लेकिन अवैध खेल आज भी जारी है।


सूत्रों की मानें तो इस पूरे रैकेट को बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा है। पहले व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क किया जाता है, फिर व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर लड़कियों को दिखाया जाता है। ग्राहक की पसंद तय होने के बाद रेट फाइनल होता है और फिर उसे एक गुप्त लोकेशन भेजी जाती है, जहां यह अवैध कारोबार अंजाम दिया जाता है। बताया जा रहा है कि यह धंधा लंबे समय से बिना किसी रोक-टोक के चल रहा है, जिससे कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहले भी हुआ था खुलासा, फिर बदला ठिकाना……
गौरतलब है कि 11 मई 2025 को इसी तरह की एक सनसनीखेज खबर सामने आई थी, जब बिरसानगर थाना क्षेत्र के विजय गार्डन स्थित एक फ्लैट में देह व्यापार का खुलासा हुआ था। खबर में बताया गया था कि एक अपार्टमेंट की नौवीं मंजिल पर यह गोरखधंधा खुलेआम चल रहा था।
उस वक्त एक स्थानीय युवक ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया था कि लंबे समय से यह अवैध गतिविधि बिना किसी डर के संचालित हो रही थी। खबर प्रकाशित होते ही इलाके में हड़कंप मच गया था और लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था।
खबर का असर : 2 दिन में खाली हुआ अड्डा…….
इस खुलासे के बाद 14 मई 2025 को खबर का सीधा असर देखने को मिला। संबंधित फ्लैट को आनन-फानन में खाली कर दिया गया और पूरा नेटवर्क वहां से गायब हो गया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया कि जागरूक पत्रकारिता समाज में बदलाव ला सकती है।
अब फिर वही खेल, नए ठिकाने पर जारी धंधा……
लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब वही नेटवर्क नए ठिकाने से फिर सक्रिय हो गया है। सूत्रों का दावा है कि पहले के मुकाबले अब यह धंधा और अधिक संगठित और सावधानी से चलाया जा रहा है, जिससे प्रशासन की नजरों से बचा जा सके।
बड़ा सवाल…..
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह गोरखधंधा?
क्यों नहीं हो रही ठोस कार्रवाई?
क्या पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
समाज पर असर……
इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं, बल्कि युवाओं और समाज के नैतिक ढांचे को भी प्रभावित करती हैं। स्थानीय लोगों में एक बार फिर चिंता और आक्रोश का माहौल है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बार क्या कदम उठाता है—क्या फिर से कार्रवाई होगी या यह खेल यूं ही चलता रहेगा?

