जमशेदपुर : झारखंड में 200 करोड़ से अधिक के चर्चित जमीन घोटाले में गुरुवार को बड़ा पुलिस एक्शन देखने को मिला। एसीबी की कार्रवाई के बाद रांची और जमशेदपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर तीन अहम आरोपियों—दिनेश अग्रवाल, आयन सरकार और निलय सेनगुप्ता—को धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद तीनों को सीधे बिष्टुपुर थाना लाया गया, जहां घंटों चली मैराथन पूछताछ में कई चौंकाने वाले सुराग हाथ लगे हैं। सूत्रों की मानें तो यह मामला अब बड़े नेटवर्क और रसूखदार कनेक्शनों तक पहुंचता नजर आ रहा है।


पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने विवादित और सरकारी जमीनों को कागजों में निजी दिखाकर करोड़ों का खेल खेला। फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री कराई गई और जमीनों की खरीद-बिक्री के नाम पर बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई. इस पूरे खेल में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की भी गहराई से जांच हो रही है। बताया जा रहा है कि मामले में और भी बड़े नामों का खुलासा हो सकता है, जिससे सियासी और कारोबारी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
रांची पुलिस की टीम पिछले एक सप्ताह से आरोपियों के पीछे लगी हुई थी। पुख्ता सूचना के आधार पर जमशेदपुर में दबिश देकर तीनों को पकड़ा गया। देर रात तक बिष्टुपुर थाने में पूछताछ का सिलसिला जारी रहा, जहां कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
कौन हैं तीनों चेहरे जानिए……
- दिनेश अग्रवाल, कदमा पाटीदार बस्ती निवासी, रेलवे जमीन कारोबार से जुड़ा बड़ा नाम। लंबे समय से जमीन खरीद-बिक्री के धंधे में सक्रिय, राजनीतिक संपर्कों के कारण प्रभावशाली माना जाता है।
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आयन सरकार, साकची का व्यवसायी, बिल्डर लॉबी से गहरे संबंध। फर्जी दस्तावेज तैयार करने और संदिग्ध ट्रांजैक्शन के आरोपों में जांच एजेंसियों के रडार पर।
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निलय सेनगुप्ता, कदमा निवासी, जमीन कारोबार से जुड़ा खिलाड़ी। कई संदिग्ध सौदों में भूमिका की आशंका, एजेंसियों की निगरानी में पहले से था।
कागजों में खेल, जमीन पर कब्जा……
जांच में खुलासा हुआ है कि पूरे रैकेट ने दस्तावेजों में हेरफेर कर फर्जी मालिक खड़े किए। सरकारी और विवादित जमीनों को निजी बताकर उनकी रजिस्ट्री कराई गई और फिर ऊंचे दामों पर बेच दिया गया. अब पुलिस इस नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस घोटाले में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

